सीने में दर्द होने के बाद भी पुलिस ने नहीं ली सुध, कोर्ट रूम से बाहर निकलते ही हुई व्यक्ति की मौत

सोमवार को सागर सिटी मजिस्ट्रेट के सामने नरेंद्र नामक व्यक्ति की पेशी हुई थी, पेशी के तुरंत बाद नरेंद्र चक्कर खा कर गिर पड़ा, अस्पताल पहुंचने तक उसकी मौत हो चुकी थी, परिजनों का आरोप है कि लगातार सीने में दर्द की शिकायत के बावजूद पुलिस ने उसकी कोई सुध नहीं ली

Updated: Nov 23, 2021, 11:07 AM IST

सीने में दर्द होने के बाद भी पुलिस ने नहीं ली सुध, कोर्ट रूम से बाहर निकलते ही हुई व्यक्ति की मौत
Photo Courtesy: Dainik Bhaskar

सागर। सागर के सिटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के तुरंत बाद पुलिस हिरासत में कैद एक व्यक्ति की मौत हो गई। नरेंद्र नामक युवक को लगातार सीने में दर्द हो रहा था। लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया। जिस वजह से कोर्ट रूम से बाहर निकलने के तुरंत बाद उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजन इस मामले में सागर की मोतीनगर पुलिस को उसकी मौत का ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। 

नरेंद्र नामक व्यक्ति को सोमवार दोपहर को मोतीनगर थाने की पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया था। दो परिवारों के बीच पानी को लेकर हुए झगड़े के बाद एक युवती मोतीनगर थाने में शिकायत करने पहुंची थी। युवती के परिवार और नरेंद्र के परिवार के बीच विवाद हुआ था, इसलिए नरेंद्र भी युवती के पीछे पीछे थाने पहुंचा था। इसी दौरान मोतीनगर थाने की पुलिस ने युवती की शिकायत पर नरेंद्र को अपनी हिरासत में ले लिया। 

हिरासत में लिए जाने के बाद नरेंद्र को सीने में दर्द की शिकायत होने लगी। पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद उसका मेडिकल चेकअप कराया। जांच के बाद नरेंद्र को पेशी के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के कोर्ट ले जाया गया। इस दौरान नरेंद्र लगातार सीने में दर्द की शिकायत करता रहा। लेकिन पुलिस ने नरेंद्र की शिकायत पर कोई सुध नहीं ली। 

करीब आधे घंटे तक सिटी मजिस्ट्रेट के आने के इंतजार में नरेंद्र को कोर्ट रूम के बाहर दर्द के साथ ही रहना पड़ा। कोर्ट में पेशी के बाद नरेंद्र को जमानत तो मिल गई। लेकिन कोर्ट ने निकलते ही वह अचानक बेसुध हो कर गिर पड़ा। नरेंद्र को चक्कर खाकर गिरता देख पुलिसकर्मी नरेंद्र को वहीं छोड़कर चले गए।  

नरेंद्र के बेसुध होते ही पत्नी नरेंद्र को अस्पताल ले जाने के लिए चिल्लाती रही। नरेंद्र को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई। लेकिन एंबुलेंस आने में देरी होने के कारण नरेंद्र को तहसीलदार की गाड़ी से अस्पताल ले जाया गया। लेकिन तब तक नरेंद्र की मौत हो चुकी थी।

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नरेंद्र के पिता मंगल प्रसाद अहिरवार ने मीडिया को बताया है कि नरेंद्र लगातार पुलिसकर्मियों से अपने सीने के दर्द में बता रहा था। लेकिन पुलिस नरेंद्र को गैस की बात कह कर उसकी शिकायत नज़रअंदाज करती रही। पिता का आरोप है कि पुलिस की इसी आनाकानी की वजह से उनके बेटे की मौत हुई है। जबकि दूसरी तरफ मोतीनगर के थाना प्रभारी का बयान भी मीडिया में सामने आया है। जिसमें थाना प्रभारी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। 

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थाना प्रभारी का कहना है कि नरेंद्र ने मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टरों से सीने में दर्द की शिकायत नहीं की थी। मेडिकल जांच भी नॉर्मल आई थी। कोर्ट रूम के बाहर निकलने के बाद वह अचानक बेसुध हो कर गिर पड़ा था। जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया। अगर उसने बताया होता कि उसकी तबीयत खराब है तो निसंदेह उसका इलाज कराया जाता।