MCU मामले में EOW की क्लोजर रिपोर्ट खारिज, पूर्व VC कुठियाला समेत अन्य आरोपियों की बढ़ी मुश्किलें

EOW की स्पेशल कोर्ट ने एमसीयू मामले में ईओडब्ल्यू द्वारा प्रस्तुत क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए जांच जारी रखने के आदेश दिए हैं, माखनलाल के पूर्व कुलपति बृजकिशोर कुठियाला पर यूनिवर्सिटी के पैसे से शराब पीने समेत अन्य आर्थिक अनिमितताओं के आरोप हैं

Updated: Apr 15, 2022, 02:58 PM IST

MCU मामले में EOW की क्लोजर रिपोर्ट खारिज, पूर्व VC कुठियाला समेत अन्य आरोपियों की बढ़ी मुश्किलें

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) में वर्ष 2003 से लेकर 2018 तक हुई आर्थिक अनियमितताओं के मामले में क्लोजर रिपोर्ट खारिज हो गया है। EOW की स्पेशल कोर्ट ने EOW द्वारा प्रस्तुत किए गए क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए जांच जारी रखने के आदेश दिए हैं। जांच समिति के सदस्य भूपेंद्र गुप्ता ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।

दरअसल, अवैध नियुक्तियों और आर्थिक अनियमितताओं की जांच कर रही EOW ने सरकार बदलने के बाद साल 2021 में पूर्व कुलपति कुठियाला समेत अन्य 19 आरोपियों को क्लीन चीट दे दिया था। EOW ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि ये आरोप द्वेषपूर्ण लगाए गए हैं और इनको साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं हैं। हालांकि, न्यायालय ने विभिन्न गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आदेश दिया कि केस क्लोज करने के बजाए दोबारा जांच की जाए।

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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पुनः जांच कर मूल दस्तावेजों से मिलान किया जाए तथा नए तथ्यों का अनुसंधान और अन्य साक्ष्यों को भी संग्रह किया जाए। जांच समिति के सदस्य रहे भूपेंद्र गुप्ता ने इस फैसले का स्वागत किया है। हम समवेत से बातचीत के दौरान गुप्ता ने कहा कि, ‘यह फैसला सुशासन के रास्ते में मील का पत्थर साबित होगा। लोकसेवकों द्वारा पद का दुरुपयोग कर डाले जा रहे डाके पर इससे रोक लगेगी और लोकसेवक निजी हितों के लिए लोकधन का दुरुपयोग करने से बाज आएंगे। इस फ़ैसले से न्यायव्यवस्था पर लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है।'

क्या है मामला

दरअसल, कमलनाथ सरकार ने माखनलाल यूनिवर्सिटी में साल 2003 से लेकर 2018 तक हुई आर्थिक अनियमितताओं और अवैध नियुक्तियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। समिति के अध्यक्ष तत्कालीन मुख्य सचिव गोपाल रेड्डी एवं सदस्य भूपेंद्र गुप्ता और संदीप दीक्षित को बनाया गया था। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। कमेटी ने बताया था कि पूर्व कुलपति कुठियाला यूनिवर्सिटी के पैसों से शराब पीते थे। 

इतना ही नहीं कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि कुठियाला ने यूनिवर्सिटी के पैसों से अपने घर मे वाइन कैबिनेट बना रखा था। यूनिवर्सिटी के पैसों से ही उन्होंने दिल्ली स्थित इंटरनेशनल सेंटर में मदिरापान किया। विवि के पैसों से उनकी पत्नी लंदन घूमने गयीं। उन्होंने सभी नियमों को ताक पर रखते हुए आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को लाखों रुपए बांटे थे। बीजेपी नेता व राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा को एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर नियुक्ति कर उन्हें घर बैठे 10 लाख रुपए वेतन के तौर पर दिया। 

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कुलपति बृजकिशोर कुठियाला एवं अन्य आरोपियों के द्वारा एसटी, एसटी एवं ओबीसी के लिए आरक्षण को दरकिनार कर उन पदों पर विशेष लोगों को अवैध नियुक्तियां दी गई थी। इन खुलासों के बाद ईओडब्ल्यू को समग्र जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन सरकार बदलते ही ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने यह कहते हुए हुए केस का क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दिया कि ये आरोप द्वेषपूर्ण हैं।

कौन हैं आरोपी

इस मामले के मुख्य आरोपी बृजकिशोर कुठियाला माखनलाल के दो बार कुलपति रह चुके हैं। वे कथित तौर पर आरएसएस से जुड़े रहे हैं। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने आरोप लगाया था कि कुठियाला ने MCU को RSS का गढ़ बना दिया था। इस मामले में कई आरोपी उच्च पदों पर बैठे हुए हैं। मसलन राकेश सिन्हा राज्यसभा सांसद हैं, संजय द्विवेदी IIMC के डायरेक्टर जनरल हैं, आरती सारंग जो माखनलाल में ही पदस्थ हैं, वह बीजेपी मंत्री विश्वास सारंग की बहन हैं। 

करोड़ों रुपयों के हेरफेर और अवैध नियुक्तियों के इस मामले में पी शशिकला, पवित्र श्रीवास्तव, अविनाश वाजपेयी, अरुण भगत, डॉ मोनिका, कंचन भाटिया, मनोज पचारिया, रंजन सिंह, सौरभ मालवीय, सूर्यकुमार, प्रदीप डहेरिया, सत्येंद्र डहेरिया, गजेंद्र अवास्या, कपिल राज और रजनी नागपाल का नाम शामिल है। जबकि दो अन्य आरोपियों का देहांत हो चुका है।