फार्मा इंडस्ट्री पर मिडिल ईस्ट तनाव का असर, दवाओं की कीमतों में आया उछाल

मिडिल ईस्ट तनाव और चीन से कच्चे माल (API) की सप्लाई रुकने से मध्यप्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री गहरे संकट में है। कच्चा माल 50% तक महंगा होने से 300 फैक्ट्रियों में उत्पादन घट गया है।

Updated: Apr 02, 2026, 01:30 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर अब मध्यप्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) की सप्लाई बाधित होने और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते राज्य की करीब 300 फार्मा यूनिट्स में उत्पादन घट गया है। कई जगह तीन शिफ्ट के बजाय केवल एक शिफ्ट में ही काम हो रहा है। जिससे दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी और उद्योग के आंशिक शटडाउन का खतरा गहराने लगा है।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, फार्मा सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें 30% से 50% तक बढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल पा रही है। जिससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ी है। नतीजतन पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन, शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी रोजमर्रा की दवाएं महंगी हो गई हैं।

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इंडियन ड्रग्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन (IDMP) मध्यप्रदेश के सचिव डॉ. अनिल सबरवाल ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में उछाल के कारण कंपनियों के लिए पुराने रेट पर दवाओं का उत्पादन करना संभव नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत दवाओं की कीमत तय होती है। जिससे कंपनियां मनमाने दाम नहीं बढ़ा सकती हैं। हालांकि, बढ़ती लागत को देखते हुए सरकार पहले ही 20 से 25 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने की अनुमति दे चुकी है लेकिन मौजूदा हालात में यह भी पर्याप्त नहीं है।

फार्मा इंडस्ट्री पर सप्लाई चेन में आई रुकावट का भी बड़ा असर पड़ा है। मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण न केवल कच्चे माल बल्कि पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। इसके साथ ही इंजेक्टेबल दवाओं के निर्माण में उपयोग होने वाली गैस की कमी भी सामने आ रही है। जिससे उत्पादन प्रक्रिया और धीमी हो गई है।

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ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के जनरल सेक्रेटरी राजीव सिंघल के अनुसार, मध्यप्रदेश की कई दवा कंपनियां मिडिल ईस्ट देशों को बड़े पैमाने पर सप्लाई करती हैं। फिलहाल API, सॉल्वेंट और एल्यूमिनियम की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कच्चे माल की उपलब्धता जल्द सामान्य नहीं हुई तो कंपनियों को उत्पादन बंद करने की नौबत आ सकती है।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि फार्मा उत्पादन में चीन से आने वाले कच्चे माल की भूमिका बेहद अहम है लेकिन वर्तमान में वहां से सप्लाई लगभग ठप हो गई है। पीथमपुर इंडस्ट्री एसोसिएशन से जुड़े कोठारी के मुताबिक, डाइक्लोफेनेक, अमॉक्सी, एजिथ्रोमाइसिन, पैरा-एमिनोफेनोल, एम्पीसिलिन और पेनिसिलिन जैसे महत्वपूर्ण घटकों की आपूर्ति पूरी तरह बाधित है।

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पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कमी ने भी समस्या को और गंभीर बना दिया है। फार्मा इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले प्रोपलीन ग्लाइकोल, पीजी 400, पीजी 6000, एसीटोन और आइसोप्रोपाइल जैसे केमिकल्स के बिना दवाओं का निर्माण संभव नहीं है। इनका उपयोग दवाओं की शुद्धिकरण और फिनिशिंग प्रक्रिया में होता है।

आने वाले समय में इंजेक्शन दवाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले कांच के एम्पुल की कमी भी बड़ी चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एम्पुल की सीलिंग के लिए एलपीजी गैस की जरूरत होती है। जबकि, पीएनजी गैस से यह प्रक्रिया प्रभावी तरीके से नहीं हो पाती। एलपीजी की अनियमित सप्लाई के कारण इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियों का उत्पादन भी घटकर एक शिफ्ट तक सीमित हो गया है।