MP में 25 जून के बाद होगी मानसून की एंट्री, 4 दिन हीटवेव का अलर्ट, कुछ जिलों में आंधी-बारिश के भी आसार
मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अब 25 जून के बाद होगी। जिससे जून में सामान्य से 48 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। आईएमडी ने जबलपुर और सागर समेत कई संभागों में चार दिनों का हीटवेव अलर्ट जारी किया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में लोगों को मानसून के लिए अभी कुछ और इंतजार करना होगा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में मानसून की एंट्री 25 जून के बाद होने की संभावना है। सामान्य तारीख से करीब एक सप्ताह की देरी के बीच अगले चार दिनों तक जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं सोमवार को प्रदेश के 21 से ज्यादा जिलों में तेज आंधी और बारिश की भी संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य प्रदेश में आमतौर पर मानसून 15 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है लेकिन इस बार 22 जून तक भी इसकी दस्तक नहीं हुई है। फिलहाल मानसून 8 जून से तेलंगाना क्षेत्र में धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। अनुमान है कि 23 जून तक यह छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर बढ़ेगा। इसके बाद यदि इसकी रफ्तार सामान्य रही तो 25 जून के बाद मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। पिछले साल मानसून 16 जून को ही प्रदेश पहुंच गया था।
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मानसून की देरी का असर प्रदेश में बारिश के आंकड़ों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जून में अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 48 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में बारिश की कमी 69 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में सामान्य से 29 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। प्रदेश के 55 में से 45 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है। अलीराजपुर में अब तक एक बूंद भी बारिश नहीं हुई। जबकि, भोपाल में सबसे अधिक करीब साढ़े चार इंच पानी दर्ज किया गया है।
बारिश में देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन की सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एस.एस. धाकड़ के अनुसार, खेतों में पर्याप्त नमी के लिए कम से कम चार इंच बारिश जरूरी है। इसके बाद ही किसानों को बुवाई करनी चाहिए।
कई किसानों ने समय पर मानसून आने की उम्मीद में पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी। अब पर्याप्त बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। हालांकि, जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, उन्हें इससे कुछ राहत मिल सकती है।
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इस बीच मौसम विभाग ने सोमवार के लिए जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में दिन के समय लू और गर्म हवाएं चलने का अनुमान जताया है। शाम के बाद इन इलाकों में मौसम बदल सकता है और आंधी के साथ बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में गर्मी का असर बना रहेगा।
झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, मैहर, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर में तेज आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम सक्रिय रहा। रायसेन में 61 मिमी यानी करीब ढाई इंच बारिश दर्ज की गई। भोपाल में दोपहर के समय तेज बारिश हुई थी। जबकि, सतना में लगभग पौन इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। जबलपुर, खजुराहो, नौगांव और सिवनी में भी बारिश का दौर जारी रहा था।
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बारिश के चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 37.1 डिग्री, ग्वालियर में 39.7 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री सेल्सियस रहा था। पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। वहां अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, दतिया 40.6 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा।




