MP: डिजिटल अरेस्ट कर रिटायर्ड उपपंजीयक से 1.12 करोड़ की साइबर ठगी, कंबोडिया से आया था कॉल
मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर ठगों ने रिटायर्ड उपपंजीयक बिहारीलाल गुप्ता से 1.12 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की। 48 दिनों तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट पर रखा।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हुई साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर सेवानिवृत्त उपपंजीयक बिहारीलाल गुप्ता को 48 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा और उनसे 1 करोड़ 12 लाख रुपये की ठगी कर ली। मामले में रविवार शाम एफआईआर दर्ज की गई है। साइबर क्राइम विंग ठगों के फोन नंबर, बैंक खातों और ट्रांजेक्शन चेन के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
यह डिजिटल अरेस्ट के जरिए की गई अब तक की दूसरी सबसे बड़ी ठगी बताई जा रही है। इससे पहले पिछले साल रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद से इसी तरह 2.51 करोड़ रुपये की ठगी की जा चुकी है।
ओल्ड खेड़ापति कॉलोनी के 57-बी में रहने वाले 75 वर्षीय बिहारीलाल गुप्ता के अनुसार, 16 नवंबर को उनके मोबाइल पर 6768532494 नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी बताते हुए रोहित शर्मा नाम बताया और कहा कि उनका मोबाइल नंबर और आधार कार्ड सीबीआई को भेजा गया है क्योंकि यह मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा हुआ पाया गया है।
कुछ ही देर बाद 8436076254 नंबर से उन्हें व्हाट्सएप पर कॉल आया। पहले वॉइस कॉल और फिर वीडियो कॉल हुई। वीडियो कॉल में वर्दी पहने एक व्यक्ति दिखाई दिया जिसने खुद को आईपीएस अधिकारी नीरज ठाकुर बताया। उसके कंधे पर आईपीएस लिखा हुआ था जिससे बिहारीलाल पूरी तरह डर गए।
फर्जी आईपीएस अधिकारी ने बताया कि उनका नाम संदीप कुमार नामक व्यक्ति के मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। उन्हें निर्देश दिए गए कि वे कमरे से बाहर नहीं निकलेंगे, किसी से बात नहीं करेंगे, यहां तक कि पत्नी से भी संपर्क नहीं रख सकते। पानी पीने तक की अनुमति ठगों की मर्जी से मिलती थी।
इस दौरान कहा गया कि उनके बैंक खातों की जांच होगी और जांच प्रक्रिया के लिए रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करानी होगी। भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होते ही पैसे वापस मिल जाएंगे।
ठगों के कहने पर बिहारीलाल गुप्ता ने अपने खाते से 60 लाख रुपये और पत्नी के खाते से 52 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। यह पूरी रकम उन्होंने जीवनभर की कमाई से म्यूचुअल फंड में निवेश की थी।
जांच में सामने आया है कि 60 लाख रुपये इंडसइंड बैंक के खाता नंबर 201035708381 में ट्रांसफर किए गए। वहीं, 30 लाख रुपये आईसीआईसीआई बैंक के खाता नंबर 244305000804 और 22 लाख रुपये यूको बैंक के खाता नंबर 05030210003541 में जमा कराए गए।
ठगों ने पीड़ित को यह कहकर और डराया कि वह बुजुर्ग हैं इसलिए उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा, बल्कि प्री-इन्वेस्टिगेशन ऑर्डर दिया जा रहा है। इसके लिए सीबीआई अधिकारी प्रदीप कुमार के नाम से आवेदन मंगवाया गया जो व्हाट्सएप पर भेजने को कहा गया। इसी बहाने उन्हें लगातार मानसिक दबाव में रखा गया।
विश्वास बनाए रखने के लिए ठग रिजर्व बैंक के नाम की फर्जी रसीदें भी भेजते रहे जिन पर सील और हस्ताक्षर लगे हुए थे। इन्हीं दस्तावेजों के जरिए पीड़ित को यह यकीन दिलाया गया कि पूरी प्रक्रिया सरकारी और वैध है।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में कॉल कंबोडिया से किए गए थे। ठगी की रकम पहले निजी बैंकों के करंट खातों में डाली गई और फिर वहां से 24 अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई। ये खाते देश के 11 राज्यों में फैले हुए हैं।
क्राइम ब्रांच के डीएसपी मनीष यादव ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर रिटायर्ड सब-रजिस्ट्रार से 1.12 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और साइबर क्राइम विंग तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।




