राज्यों की रैंकिंग में MP फिसड्डी, आर्थिक सूचकांक में नीचे से दूसरा स्थान, सामाजिक विकास में भी बुरी तरह पिछड़ा

शिवराज सरकार ने विकास के सभी पैमाने पर मध्यप्रदेश को किया चौपट, रेटिंग एजेंसी केयर एज की स्टेट रैंकिंग रिपोर्ट 2023 के मुताबिक आर्थिक विकास के मामले में 17 बड़े राज्यों में 16वें स्थान पर, जबकि सामाजिक सूचकांक में 14वां रैंक

Updated: Jan 18, 2023, 08:20 PM IST

राज्यों की रैंकिंग में MP फिसड्डी, आर्थिक सूचकांक में नीचे से दूसरा स्थान, सामाजिक विकास में भी बुरी तरह पिछड़ा

भोपाल। शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में मध्य प्रदेश विकास के पैमानों पर बुरी तरह पिछड़ता जा रहा है। आर्थिक, सामाजिक और शासन के संचालन के मामले में मध्य प्रदेश की दुर्दशा एक बार फिर से उजागर हुई है। आर्थिक सूचकांक में मध्य प्रदेश 17 बड़े राज्यों में नीचे से दूसरे स्थान पर है। राज्य की बदहाली का खुलासा रेटिंग एजेंसी केयर एज की स्टेट रैंकिंग रिपोर्ट में हुई है।

केयर एज रेटिंग्स की ओर से जारी "स्टेट रैंकिंग रिपोर्ट 2023" के मुताबिक आर्थिक विकास के मामले में मध्य प्रदेश 17 बड़े राज्यों में 16वें स्थान पर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक मोर्चे पर पड़ोसी राज्यों (कांग्रेस शासित राजस्थान और छत्तीसगढ़) की स्थिति मध्य प्रदेश से काफी बेहतर है। साख निर्धारित करने वाली और शोध कंपनी केयर एज ने राज्यों की समग्र रैंकिंग में यह निष्कर्ष निकाला है। 

रैकिंग तैयार करते समय बुनियादी ढांचे की स्थिति, वित्तीय समावेशन, राजकोषीय प्रबंधन और पर्यावरण पर भी गौर किया गया है। समग्र रैकिंग में मध्य प्रदेश 17 बड़े राज्यों की सूची में 13वें स्थान पर है। इसका कारण सामाजिक क्षेत्रों में राज्य का बदतर प्रदर्शन है। जबकि पड़ोसी राज्य राजस्थान समग्र रैंकिंग में बेहतर कर रहा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने नीतियां अपनायी हैं, उसका लाभ दिख रहा है। 

वित्तीय समावेशन (Financial includion) के मामले में भी मध्य प्रदेश की स्थिति शर्मनाक है। 17 बड़े राज्यों की सूची में MP 15वें स्थान पर है। यानी नीचे से तीसरे स्थान पर। मध्य प्रदेश से नीचे सिर्फ दो राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार हैं। जबकि पड़ोसी राजस्थान और छत्तीसगढ़ क्रमशः 8वें और 13वें स्थान पर जगह बनाने में कामयाब हुए हैं। केयर एज ने शिवराज सरकार के ऊंची विकास दर के दावे, बड़े पैमाने में प्रदेश में निवेश के दावे को झूठा साबित कर दिया है। 

राजकाज के स्तर पर मध्य प्रदेश पांचवें स्थान पर है, जबकि पड़ोसी राज्य राजस्थान चौथे स्थान पर है। यानी राजकाज (Governance) में भी गहलोत शासित राजस्थान मध्य प्रदेश से आगे है। भौतिक बुनियादी ढांचे की बात करें तो इस सूची में मध्य प्रदेश को 13वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। इस इंडेक्स पर भी राजस्थान की स्थिति मध्य प्रदेश से ठीक है।

रिपोर्ट के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में सामाजिक विकास में भी मध्य प्रदेश काफी पिछड़ गया है। सामाजिक सूचकांक में मध्य प्रदेश 14वें स्थान पर है। जबकि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ और राजस्थान की स्थिति काफी बेहतर है। हैरानी की बात ये है कि पर्यावरण सूचकांक में भी मध्य प्रदेश आठ राज्यों से पीछे है। सर्वाधिक वनभूमि होने के बावजूद मध्य प्रदेश पर्यावरण को संजोने के मामले में 9वें स्थान पर है। 

केयर एज की स्टेट रैंकिंग रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस राज्य सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने कहा, 'रिपोर्ट से साबित हो गया कि शिवराज सरकार "ऋण कृत्वा घृतं पीबेत" को चरितार्थ कर रही है। प्रदेश सरकार द्वारा लाखों करोड़ रुपए का ऋण लिया गया, बड़े स्तर पर कमीशनखोरी की गई, नतीजतन विकास के पैमाने पर हम पर जीरो हैं।'

आनंद जाट ने आगे कहा, '2003 में दिग्विजय सिंह की सरकार के दौरान प्रदेश पर महज 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था, जो प्रति व्यक्ति मात्र 3300 रुपए आता है। आज शिवराज सरकार ने इसे 20 गुना बढ़ा दिया। आज प्रदेश पर चार लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज है। मप्र के हर व्यक्ति के माथे अब करीब 50 हजार रुपए कर्जा है। कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार मध्य प्रदेश की सच्चाई है। कर्ज लेकर नेताओं और अधिकारियों ने घी पिया लेकिन हमारे बच्चे भूखे रह गए। शिवराज सरकार बच्चों का पोषण आहार तक खा गई।'