नर्मदापुरम में 1242 पेड़ों की अवैध कटाई पर NGT सख्त, वन अधिकारियों की लापरवाही पर लिया संज्ञान

नर्मदापुरम के इटारसी जोन की छिपीखापा बीट में 1242 पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लिया है।

Updated: Jan 19, 2026, 01:44 AM IST

नर्मदापुरम। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नर्मदापुरम वन मंडल के अंतर्गत इटारसी जोन की छिपीखापा बीट में 1242 पेड़ों की अवैध कटाई के गंभीर मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई है। न्यायिक सदस्य जस्टिस एस.के. सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की एनजीटी की युगलपीठ ने इसे पर्यावरण से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला करार दिया है।

अधिकरण ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट कहा कि 1242 पेड़ों की बली चढ़ा दी गई। इसके बावजूद स्थानीय वन अधिकारियों ने पुष्टि होने के बाद भी इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। न तो समय पर जानकारी उच्च स्तर तक पहुंचाई गई और न ही कोई ठोस वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया। एनजीटी ने इसे अधिकारियों की घोर लापरवाही माना है।

एनजीटी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले नगर निगम ग्रेटर मुंबई बनाम अंकिता सिन्हा (2022) का हवाला देते हुए अपने स्वतः संज्ञान लेने के अधिकार का प्रयोग किया। अधिकरण ने संबंधित वन मंडलाधिकारी और मुख्य वन संरक्षक को निर्देश दिए हैं कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ की जाए।

साथ ही अधिकरण ने राज्य को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने और अवैध रूप से काटी गई लकड़ी की बिक्री से अर्जित लाभ की वसूली कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। एनजीटी ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले से जुड़ी सभी जानकारियां रिकॉर्ड पर लाई जाएं ताकि जवाबदेही तय हो सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वरिष्ठ वन अधिकारियों और नर्मदापुरम नगर निगम को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि छिपीखापा बीट क्षेत्र में 1242 सागौन और 38 सटकटा पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी। इससे राज्य सरकार को 2.04 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। यह चौंकाने वाला खुलासा 14 सितंबर 2025 को तैयार की गई निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आया था लेकिन इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई थी।  हालांकि, इस पर अब एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाया है।