पन्ना के ब्लड बैंक में तीन महीने से खून का अभाव, 17 घंटे तड़पने के बाद युवती ने तोड़ा दम

मध्य प्रदेश के पन्ना में बेटी को ब्लड दिलाने के लिए भटकता रहा पिता, सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक ने खड़ा किया हाथ, भगवान भरोसे चल रहा जिला अस्पताल

Updated: Jan 04, 2021, 05:50 PM IST

पन्ना के ब्लड बैंक में तीन महीने से खून का अभाव, 17 घंटे तड़पने के बाद युवती ने तोड़ा दम
Photo Courtesy: Punjab kesari

पन्ना। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए गए तमाम दावों को प्रदेश के जिला अस्पताल आए दिन गलत साबित कर रहे हैं। ताज़ा मामला पन्ना जिला का है जहां खून के अभाव में युवती 17 घंटे तक तड़पती रही और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। इस दौरान युवती का पिता ब्लड बैंक का चक्कर काटता रहा लेकिन बैंक ने हाथ खड़े कर दिए। पन्ना जिला अस्पताल में पिछले तीन महीनों से खून की किल्लत है, जिसे दूर करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

जानकारी के मुताबिक शनिवार को जिले की अमानगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम पिपरवाह निवासी प्रताप यादव अपनी 30 वर्षीय पुत्री संपत यादव को लेकर पन्ना जिला अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के डॉक्टरों ने शाम पांच बजे प्रताप को बताया कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द खून चढ़ाने की ज़रूरत है। खून के बिना उसे बचा पाना संभव नहीं है। वृद्ध पिता अपनी बेटी के लिए खून की व्यवस्था करने की कोशिश में ब्लड बैंक और आसपास पूरी रात भटकते रहे।

प्रताप को ओ पॉजिटिव ब्लड मुहैया कराने के लिए ब्लड बैंक ने पहले ही हाथ खड़ा कर दिया था। उन्होंने अपने सभी जानने वालों और रिश्तेदारों को फ़ोन लगाया और आसपास के इलाकों में भी पूरी रात कोशिश करते रहे, लेकिन खून का कोई इंतज़ाम नहीं हो पाया। इस दौरान स्थानीय समाजसेवी राम बिहारी गोस्वामी ने प्रताप को कहा कि सुबह तक खून की व्यवस्था हो जाएगी। लेकिन अगली सुबह जबतक गोस्वमी खून की व्यवस्था कर पाते प्रताप की बेटी ने उनकी आंखों के सामने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

पीड़ित पिता का कहना है कि शाम को ही अगर खून मिल जाता तो उनकी बेटी आज जिंदा होती। मगर विडंबना है कि पन्ना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में पिछले 3 महीने से खून का अभाव बना हुआ है। आरोप है कि वहां अक्सर एक भी यूनिट ब्लड उपलब्ध नहीं रहता है। इस मामले में समाजसेवी राम बिहारी गोस्वामी ने कई बार शासन प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की है। मगर समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसका खामियाजा मरीज़ों की मौत के रूप में आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।