खरगोन में 6 पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज करने के विरोध में प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जिला कलेक्ट्रेट में पत्रकारों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, सरकारी प्रेस वार्ताओं का किया बायकॉट, खनन माफिया के खिलाफ सवाल पूछने पर हुई है 6 मीडियाकर्मियों पर FIR, कांग्रेस ने प्रशासन पर लगाया चौथे स्तंभ को कुचलने का आरोप

Updated: Jul 06, 2021, 07:29 PM IST

खरगोन में 6 पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज करने के विरोध में प्रदर्शन,  मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

खरगोन। खनन माफिया पर सवाल उठाने वाले मीडियाकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को खरगोन के पत्रकारों ने इस FIR के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मीडियाकर्मियों ने काली पट्टी बांधकर काम किया औऱ पत्रकारों के खिलाफ दर्ज की गई FIR वापस लेने की मांग की। पत्रकारों ने जिला कलेक्टर में प्रदर्शन किया और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की कोशिश की। इस दौरान पत्रकारों को कई घंटे तक गेट पर बैठना पड़ा उन्हें कलेक्ट्रेट के भीतर नहीं घुसने दिया गया। जिसके बाद मीडियाकर्मियों ने वह ज्ञापन पुलिस अधीक्षक को सौंप दिया। मुख्यमंत्री को संबोधित इस ज्ञापन में पत्रकारों ने अपने साथियों के खिलाफ दर्ज की गई FIR रद्द करने की मांग की है।

इस FIR के विरोध में जिले के पत्रकारों ने मीडिया कवरेजबंद कर दिया। नाराज पत्रकारों ने प्रशासन की प्रेस कांफ्रेंस का बहिष्कार करने का फैसला किया और स्थानीय प्रशासन की कवरेज बंद कर दी। पत्रकारों ने प्रशासन पर स्थानीय मीडिया को फर्जी आरोप में फंसाकर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। पत्रकारों का आरोप है कि अवैध खनन के मामले में खनिज अधिकारी ने जवाब देने के बजाय पत्रकार आसिफ खान पर अभद्रता का आरोप लगाया। और अन्य मीडियाकर्मियों के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट और सरकारी काम में बाधा डालने की शिकायत दर्ज कराई है। दरअसल इस मामले में कांग्रेस ने प्रशासन पर चौथे स्तंभ को कुचलने का आरोप लगया है। दरअसल इस घटना की निंदा, पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव समेत कई नेताओं ने की है। वहीं गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच की मांग की है।

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 दरअसल अवैध खनन पर सवाल करने वाले 6 पत्रकारों के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इसमें प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के 6  मीडियाकर्मी शामिल हैं। इन रिपोर्टर ने खरगोन जिले में बेखौफ चल रहे अवैध खनन पर खनन अधिकारी से सवाल किए इस पर जबाव देने की जगह खनन अधिकारी ने उनके साथ गाली गलौज की और कमरे से भगा दिया। जब इस मामले की जानकारी मीडियाकर्मियों ने कलेक्टर को दी तो वहां खनिज अधिकारी पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। लेकिन बाद में उन सभी मीडियाकर्मियों पर एट्रोसिटी एक्ट और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाकर केस दर्ज कर लिया गया और तो और उनमें अभद्रता करने के गवाह के तौर पर उन्हीं लोंगों को साक्षी बनाया गया है, जिनके खिलाफ पत्रकारों ने आवाज उठाई थी।

खनिज अधिकारी सावन चौहान ने अपनी FIR में गवाह खरगोन के ठेकेदार दिनेश यादव और अमित भावसार को बनाया है, इन्ही दोनों ठेकेदारों पर अवैध उत्खनन और स्टोरेज का आरोप लगा है। दरअसल इन दोनों ठेकेदारों को बीजेपी का पूरा सपोर्ट मिला हुआ है। ये दोनों बीजेपी युवा मोर्चा के नेता हैं।  खरगोन कोतवाली में पत्रकार आसिफ खान (NDTV), प्रवीण पाल (मध्यप्रदेश खबर), वाहिद खान (स्टेट न्यूज़), पवन कुमार सोलंकी (दैनिक परिवर्तन), प्रदीप गांगले (नेशन टूडे) और धर्मेंद्र चौहान (दैनिक दीनबंधु) के खिलाप शिकायत दर्ज है।