रेडिसन होटल को पानी की बोतल पर अतिरिक्त शुल्क वसूलना पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने मुआवजे का दिया आदेश

भोपाल के रेडिसन होटल में 60 रुपए की पानी की बोतल के 175 रुपए वसूलने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया। होटल को मुआवजा और राशि लौटाने के निर्देश दिए गए हैं।

Updated: Jun 25, 2026, 02:32 PM IST

भोपाल। राजधानी भोपाल के एक प्रमुख होटल में पानी की बोतल पर अतिरिक्त जीएसटी वसूले जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि होटल और रेस्टोरेंट एमआरपी से अधिक कीमत पर उत्पाद बेच सकते हैं लेकिन निर्धारित कीमत पर अलग से जीएसटी जोड़कर वसूली करना नियमों के अनुरूप नहीं है। आयोग ने होटल को अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटाने के साथ मुआवजा और वाद व्यय का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

यह मामला अप्रैल 2022 का है। रायसेन रोड निवासी हुकुम सिंह ठाकुर अपने चार साथियों के साथ भोपाल स्थित होटल रेडिसन में बुफे डिनर के लिए पहुंचे थे। भोजन के दौरान उन्होंने मिनरल वॉटर की एक बोतल ली। बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 60 रुपए अंकित था। जबकि, होटल के बिल में इसके लिए 175 रुपए जोड़े गए थे।

डिनर के बाद जब कुल 6809.88 रुपए का बिल प्रस्तुत किया गया तो हुकुम सिंह ने पानी की बोतल की कीमत पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका आरोप था कि होटल प्रबंधन ने उनकी शिकायत पर कोई राहत नहीं दी। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने जून 2026 में अपना निर्णय सुनाया।

सुनवाई के दौरान होटल प्रबंधन ने दलील दी कि होटल और रेस्टोरेंट में ग्राहकों को केवल उत्पाद नहीं बेचे जाते बल्कि उनके साथ बैठने की व्यवस्था, वातानुकूलित वातावरण, लाउंज सुविधा, संगीत, सेवा और अन्य आतिथ्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इसी वजह से मेन्यू में दर्शाई गई कीमतें लागू होती हैं और पैकेज्ड वस्तुओं पर अंकित एमआरपी सीधे तौर पर होटल सेवाओं पर लागू नहीं होती। होटल ने यह भी कहा कि मेन्यू कार्ड में पहले से उल्लेख था कि जीएसटी अलग से लिया जाएगा।

आयोग ने अपने फैसले में माना कि होटल द्वारा एमआरपी से अधिक कीमत लेना स्वतः अवैध नहीं माना जा सकता। इस संबंध में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया। हालांकि, आयोग ने यह भी कहा कि जब होटल ने पानी की बोतल की कीमत 175 रुपए तय कर दी थी तब उस राशि में जीएसटी शामिल माना जाना चाहिए था। ऐसे में उसी कीमत पर अतिरिक्त 18 प्रतिशत जीएसटी के रूप में 10.80 रुपए वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

आयोग ने होटल को उपभोक्ता से वसूले गए अतिरिक्त 10.80 रुपए वापस करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना के लिए 5 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपए देने का आदेश भी दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है तो होटल को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

शिकायतकर्ता हुकुम सिंह ठाकुर ने आयोग के समक्ष यह भी आरोप लगाया कि बिल पर सवाल उठाने के दौरान होटल स्टाफ ने उनके साथ बहस की और अभद्र व्यवहार किया। उनका कहना है कि अतिरिक्त जीएसटी वसूली को लेकर उन्हें न्याय मिला। हालांकि, एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने के मुद्दे पर आयोग ने सीमित राहत दी।

मामले में शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता शशिकांत वर्मा ने कहा कि यह विवाद केवल 10.80 रुपए की राशि का नहीं बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, कई होटल और रेस्टोरेंट सुविधाओं के नाम पर ऊंची कीमतें वसूलते हैं इसलिए यह फैसला उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने वाला है।

निर्णय में आयोग ने दो महत्वपूर्ण मामलों का भी उल्लेख किया। इनमें फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (सिविल अपील संख्या 21790/2017, निर्णय दिनांक 12 दिसंबर 2017) और आईटीसी लिमिटेड बनाम के.सी. खन्ना (अपील संख्या A/2013/2201, निर्णय दिनांक 4 सितंबर 2023) शामिल हैं। इन फैसलों में कहा गया था कि होटल, रेस्टोरेंट, एयरलाइन और रेलवे जैसे संस्थागत सेवा प्रदाता पैकेज्ड उत्पादों को अपनी सेवाओं के हिस्से के रूप में उपलब्ध कराते हैं। इसलिए उन पर सामान्य खुदरा दुकानों वाले एमआरपी नियम उसी स्वरूप में लागू नहीं होते। इसी आधार पर आयोग ने माना कि होटल द्वारा एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है।