मध्य प्रदेश में मानसून ने दी दस्तक, भोपाल-इंदौर सहित 14 जिलों में बारिश, 42 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन से चार दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को कवर करेगा।

Updated: Jun 24, 2026, 06:45 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में आखिरकार 9 दिन की देरी के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी है। बुधवार को मानसून बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, खंडवा और बुरहानपुर होते हुए प्रदेश में दाखिल हुआ। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए 42 जिलों में आंधी, गरज-चमक और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

मानसून की एंट्री के साथ भोपाल-इंदौर और उज्जैन समेत 14 जिलों में बारिश हुई। भोपाल के बैरसिया रोड और लांबाखेड़ा में तेज बारिश हुई तो इंदौर में झमाझम बारिश ने लोगों को गर्मी और उमस से राहत दिलाई। रायसेन में शाम 5 बजे के बाद तेज बारिश शुरू हो गई, जबकि उज्जैन में दिनभर की उमस के बाद रिमझिम फुहारों ने मौसम सुहावना कर दिया।

नीमच के मनासा, रामपुरा, कुकड़ेश्वर और जन्नौद में जोरदार बारिश हुई। शाजापुर में कई इलाकों में 10 से 15 मिनट तक बारिश दर्ज की गई, जबकि बड़वानी में तेज हवाओं और बिजली की गर्जना के बीच करीब आधे घंटे तक बारिश हुई। हरदा और डिंडौरी में भी मानसून की पहली बारिश ने लोगों को राहत पहुंचाई।

खरगोन के झिरन्या, पीपलझोपा और भीकनगांव क्षेत्र में बारिश दर्ज की गई, वहीं पांढुर्णा में करीब 2 इंच बारिश के बाद कपास और मक्का की बुवाई शुरू हो गई है। बैतूल और खंडवा में मानसून की आधिकारिक एंट्री हो चुकी है। हालांकि कुछ इलाकों में अभी बादल छाए हैं और लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन से चार दिनों में मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को अपनी चपेट में ले लेगा। मानसून आगमन से पहले ही प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां तेज रहीं। पिछले 24 घंटों के दौरान 39 जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। इंदौर, भोपाल, रायसेन, सीहोर, धार, उज्जैन, राजगढ़, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, ग्वालियर और सागर समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। बालाघाट जिले में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई।

प्रदेश में मानसून की देरी का असर जून के बारिश आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 78.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 37.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है। यह सामान्य से 53 प्रतिशत कम है। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर सहित 48 जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है। कम बारिश के कारण सोयाबीन सहित खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक होती है। फिलहाल भोपाल ऐसा प्रमुख जिला है जहां पांच इंच के करीब बारिश दर्ज हो चुकी है, जो सामान्य से 63 प्रतिशत अधिक है।