इंदौर में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल, वर्क प्रेशर कम करने के लिए नॉन एकेडमी जूनियर की मांग पर अड़े

ऑल इंडिया नीट पीजी काउंसलिंग में देरी से नाराज जूनियर डाक्टर्स ने काम बंद किया, जूडा जल्द काउंसलिंग या फिर नॉन एकेडमी जूनियर्स की भर्ती की मांग कर रहा है, हड़ताल की वजह से अस्पतालों का कामकाज प्रभावित, मरीज परेशान

Updated: Dec 21, 2021, 01:12 PM IST

इंदौर में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल, वर्क प्रेशर कम करने के लिए नॉन एकेडमी जूनियर की मांग पर अड़े
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इंदौर। कोरोना की तीसरी लहर औऱ ओमिक्रॉन के बढ़ते मरीजों की संख्या के बीच इंदौर में जूडा की हड़ताल है। दो जिन से महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डाक्टर्स ने काम बंद कर दिया है। जूडा ने अपनी मांगें मनवाने के लिए इस बार आपताकालीन सेवाओं का भी बहिष्कार किया है। MGM के जूनियर डाक्टर की ड्यूटी MY अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में लगाई जाती है। लेकिन इनकी हड़ताल की वजह से मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पतालों में इलाज के लिए आए डाक्टरों की दर-दर भटकना पड़ रहा है।

इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर्स ड्यूटी नहीं कर रहे हैं।  दरअसल नीट पीजी का रिजल्ट आए दो महीने से ज्यादा का वक्त हो गया हैस लेकिन इनकी कॉउंसलिंग में देरी हो रही है। FORDA के आह्वान पर इंदौर के जूनियर डॉक्टर ने काम बंद कर दिया है। सोमवार से जारी हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि काउंसलिंग में देरी की वजह से एडमिशन नहीं होने के कारण यह साल जीरो इयर होने की कगार पर है। ऐसे में साल 2019 -2020 के बैच के डॉक्टर्स पर काम का एक्सट्रा बोझ पड़ रहा है। बड़ी संख्या में डाक्टर्स डिप्रेशन और स्ट्रेस से ग्रसित होते जा रहे हैं।

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 जूडा की मांग है कि ऑल इंडिया नीट पीजी काउंसलिंग 2021-2022 का शेड्यूल जल्द से जल्द जारी हो। स्टेट कोटे की काउंसलिंग शीघ्र कराई जाए। क्योंकि MCC के पत्र के अनुसार ऑल इंडिया कोटे की सीट अब स्टेट कोटे में नही बदली जाएंगी। जूडा की डिमांड है कि जब तक नए जूनियर डॉक्टर नहीं आते तब तक नॉन एकेडमी जूनियर रख दिए जाएं, ताकि जूनियर डाक्टर्स का प्रेशर कुछ कम किया जा सके। कोरोना की तीसरी लहर और ओमिक्रॉन के मरीजों की आशंका की वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है। आने वाले समय में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जूडा ने अपनी मांगें मनवाने के लिए हड़ताल का रास्ता अपनाया है। इससे पहले नबंवर के आखिरी दिनों में भी जूडा की देशव्यापी हड़ताल हुई थी। जिसे मध्यप्रदेश के 3 हजार से ज्यादा जूनियर डाक्टरों का समर्थन मिला था।