सिख जत्थे को ननकाना साहिब जाने से रोकने पर भारी नाराज़गी, अकाल तख्त के जत्थेदार ने अंग्रेज़ी राज से की तुलना

ननकाना साहिब नरसंहार की 100वीं बरसी पर सिख जत्थे को पाकिस्तान के ननकाना साहिब जाने से रोकने के मोदी सरकार के फ़ैसले की कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कड़ी आलोचना की है

Updated: Feb 22, 2021, 12:06 PM IST

सिख जत्थे को ननकाना साहिब जाने से रोकने पर भारी नाराज़गी, अकाल तख्त के जत्थेदार ने अंग्रेज़ी राज से की तुलना
Photo Courtesy: IndianExpress

अमृतसर। सिखों के जत्थे को अंतिम वक्त में पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब जाने से रोकने के केंद्र सरकार के फैसले का कड़ा विरोध हो रहा है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मोदी सरकार के इस कदम की तुलना अंग्रेजी राज से करते हुए कहा है कि सिख अगले 100 वर्षों तक याद रखेंगे कि नरसंहार की 100 वीं बरसी पर उन्हें ननकाना साहिब जाने से रोक दिया गया था। जत्थेदार ने यह भी कहा है कि गृह मंत्री अमित शाह ने सिखों के जत्थे को अंतिम समय में अनुमति देने से इनकार करके सौ साल पहले हुए ननकाना साहिब नरसंहार के दर्द की टीस को फिर ताज़ा कर दिया है। 

अकाल तख्त के जत्थेदार ने इस दौरान केंद्र की मोदी सरकार को अंग्रेजों से भी बुरा बताया। उन्होंने कहा, 'भारत सरकार ने एक बार फिर से हमें सौ साल पहले हुए ननकाना साहिब नरसंहार के दर्द की याद दिला दी। गुरु नानक के जन्म स्थान पर ननकाना साहिब की शताब्दी को लेकर केंद्र सरकार का रवैया अंग्रेजों की तरह ही है। भारत सरकार उसी रास्ते पर चल रही है, जिस रास्ते पर अंग्रेज सौ साल पहले चलते थे। यह देश के हित में नहीं है। सरकार को यह महसूस करना चाहिए कि इस देश में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हैं।'  

दरअसल, गुरु नानक देव जी के जन्म स्थान गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब को मुक्त कराने के लिए 100 साल पहले हुए संघर्ष औऱ उस दौरान हुए बलिदान की पहली शताब्दी मनाई जा रही है। इस मौके पर सिखों का एक जत्था अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की अगुवाई में पाकिस्तान के ननकाना साहिब जाने वाला था। लेकिन  मोदी सरकार ने आखिरी वक्त में इस जत्थे को जाने से रोक दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस फैसले के बाद सिखों ने भारत में ही वैकल्पिक कार्यक्रम आयोजित किए। 

रविवार को ऐसा ही एक कार्यक्रम शहीद भाई लक्ष्मण सिंह धरोवाली के गुरदासपुर जिले के गोधरपुर गांव में आयोजित किया गया। इसमें जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भी शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में शहीदों के उन 32 परिवारों ने भी हिस्सा लिया जिन्होंने नरसंहार के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया था।

इस कार्यक्रम में जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों और अल्पसंख्यकों के बारे में उसके रवैये की कड़ी आलोचना की। हरप्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि 'केंद्र सरकार ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। उसकी नीति है कि पहले बहुसंख्यकों के मन में मुसलमानों और सिखों के खिलाफ नफरत पैदा करो। फिर मुसलमानों पर हमले करो, सिखों को मारो और बहुमत मत पाओ। यह राजनीति न तो सरकार के लिए अच्छी है, न ही भारत के लिए। ध्रुवीकरण की राजनीति भारत को बर्बाद कर देगी।' 

उन्होंने आगे कहा, 'आज हमारे खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। फिर हम पर हमला किया जाएगा। लेकिन सिखों को खत्म नहीं किया जा सकता, औरंगज़ेब भी इसमें असफल रहा था। सिखों का गौरवशाली इतिहास उन्हें अधिकारों और सच्चाई के लिए लड़ने को प्रेरित करता है। सिखों को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक रूप से समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारा अस्तित्व खतरे में है, इसलिए अब हमारी कौम के लिए एकजुट होना जरूरी है।'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने भी सिख जत्थे को ननकाना साहिब जाने से रोकने के केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि ऐसे उदाहरण मोदी-शाह और बीजेपी की संकीर्ण विचारधारा को प्रदर्शित करते हैं। सिक्ख जत्थों को इजाज़त मिलनी चाहिए।

 

दिग्विजय सिंह ने पूर्व पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले के एक ट्वीट को रिट्वीट भी किया है, जिसमें साकेत ने सिख जत्थों को ननकाना साहिब की सौ वीं बरसी पर जाने से रोकने का विरोध किया है। साकेत गोखले ने यह भी लिखा है कि सिख जत्थे को कोविड 19 के नाम पर रोकना बेहद हैरान करने वाला है, खासकर तब जबकि मार्च में कुंभ मेला आयोजित होने जा रहा है। गोखले का कहना है कि किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में ऐसा किया जाना और भी निराशाजनक है।