गोरखपुर: मौतों के आंकड़े छिपाने का नायाब तरीका, श्मशान में तस्वीर उतारने को बना दिया गया दंडनीय अपराध

गोरखपुर प्रशासन ने श्मशान घाटों के बाहर बैनर और पोस्टर लगा दिए, जिसमें लिखा था कि फोटो लेना और वीडियो बनाना दंडनीय अपराध है, बाद में विवाद बढ़ने पर इसे हटा लिया गया

Updated: May 02, 2021, 11:25 AM IST

गोरखपुर: मौतों के आंकड़े छिपाने का नायाब तरीका, श्मशान में तस्वीर उतारने को बना दिया गया दंडनीय अपराध
Photo Courtesy: Social media

लखनऊ/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में प्रशासन ने कोरोना से मौतों को आंकड़े को छिपाने का नायाब तरीका ढूंढ निकाला है। स्थानीय प्रशासन ने श्मशान घाटों के बाहर एक बैनर चस्पा दिया। जिसमें लिखा हुआ था कि तस्वीर लेना और वीडियो बनाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। सोशल मीडिया पर जब ये तस्वीरें वायरल हुईं। तब विवाद बढ़ने के बाद रातों रात इन बैनरों को हटा लिया गया।

पूरे देश की तरह ही गोरखपुर में भी श्मशान घाटों पर भारी संख्या में चिताएं रोज़ाना जल रही हैं। गोरखपुर में भी पूरे देश भर जैसा भयावह मंज़र है। लिहाज़ा यह मंज़र जनता की ज़हन में जगह न पाए इसलिए गोरखपुर प्रशासन ने तस्वीरों और वीडियो लिए जाने को ही अपराध की श्रेणी में डाल दिया। ताकि श्मशान घाटों के ये भयावह मंज़र बाहर आने से बच जाएं। 

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कभी योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र रहे गोरखपुर में श्मशान घाटों पर बैनर टांग दिए गए थे। जिसमें लिखा हुआ था, शवदाह गृह पर पार्थिव शरीर का दाह संस्कार हिन्दू रीति रिवाजों से किया जा रहा है। कृपया फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी न करें। ऐसा करना दंडनीय अपराध है।

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जल्द ही यह बैनर सोशल मीडिया पर तैरने लगे। बैनरों को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध हुआ। प्रशासन पर यह आरोप लगाया गया कि प्रशासन ने ऐसा कदम कोरोना से हो रही मौतों के आंकड़ों को छिपाने के लिए उठाया है। इसके बाद विरोध को बढ़ता देख प्रशासन ने सभी बैनरों को रातों रात हटवा दिया।