बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी का इस्तीफा, भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए थे

मेवालाल चौधरी का इस्तीफा विधानसभा चुनाव हारने वाले दलों की विपक्ष के तौर पर पहली सियासी जीत और चुनाव जीतकर सरकार बनाने वाली पार्टियों की पहली नैतिक हार है

Updated: Nov 19, 2020, 04:56 PM IST

बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी का इस्तीफा, भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए थे

पटना। बिहार की नीतीश सरकार के लिए नए कार्यकाल की शुरुआत बेहद खराब रही है। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के नेता मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री के तौर पर कार्यभार संभालने के पहले ही दिन पद से इस्तीफा देना पड़ा। वो भी भ्रष्टाचार के आरोपों में बुरी तरह घिरने के बाद। हालांकि मेवालाल के इस्तीफे की खबर आने के थोड़ी देर पहले ही बीजेपी नेता और नीतीश सरकार की उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने ये कहते हुए उनका बचाव किया था कि सिर्फ आरोप लगने से कोई दोषी नहीं हो जाता। लेकिन कुछ ही देर में पता चला कि राजनीति में आरोप लगने से कई बार इस्तीफा ज़रूर हो जाता है।

बहरहाल, मेवालाल चौधरी मंत्री पद की शपथ लेने से लेकर इस्तीफा देने तक लगातार गलत वजहों से सुर्खियों में बने रहे। इस छोटे से वक्त में उन्होंने आरजेडी को बिहार का विधानसभा चुनाव जीतते-जीतते हार जाने के मलाल से उबरकर तेज़-तर्रार विपक्ष का किरदार सफलतापूर्वक निभाने में काफी मदद की। दिलचस्प बात यह भी है कि मेवालाल चौधरी का यह इस्तीफा चुनाव हारने वाले दलों की विपक्ष के तौर पर पहली सियासी जीत, और चुनाव जीतकर सरकार बनाने वालों की पहली नैतिक हार है।

नये-नवेले शिक्षा मंत्री के इस्तीफा देने के समाचार से पहले खबर ये भी आई कि मेवालाल चौधरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तलब किया था। घटनाक्रम की इस क्रोनोलॉजी को समझने से तो यही लगता है कि नए कार्यकाल की शुरुआत में ही सरकार की बिगड़ती इमेज से फिक्रमंद नीतीश कुमार ने ही अपने मंत्री से इस्तीफा देने को कहा होगा। लेकिन बीजेपी कोटे से मुख्यमंत्री बनीं रेणु देवी इस्तीफे से कुछ ही देर पहले जिस तरह मेवालाल के बचाव में उतरीं, वह क्रोनोलॉजी क्या संकेत दे रही है, ये आने वाले दिनों में ही साफ होगा।

सरकार में मंत्रिमंडल के गठन के बाद से ही विपक्ष के निशाने पर रहे मेवालाल चौधरी ने आज ही शिक्षा मंत्री के तौर पर अपना कार्यभार संभाला था। मेवालाल चौधरी पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहने के दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में धांधली करने का आरोप है।  

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नीतीश कुमार ने कल मिलने बुलाया था 

मेवालाल चौधरी की चौधरी की नियुक्ति पर लगातार बवाल को बढ़ता देख कल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें तलब किया था। हो सकता है नीतीश कुमार ने तभी उन्हें त्यागपत्र देने को कह दिया हो। दिलचस्प बात यह है कि उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने आज ही मेवालाल चौधरी का बचाव करते हुए उन्हें एक अच्छा और सुलझा हुआ नेता बताया था। रेणु देवी ने यह भी कहा था कि सिर्फ आरोप लग जाने से कोई दोषी नहीं हो जाता।

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बहरहाल, मेवालाल चौधरी ने अपने ऊपर लग रहे सभी आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने राजधानी पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान ये दावा भी कर डाला कि वे कोर्ट से बरी हो चुके हैं। जबकि हकीकत यह है कि मेवालाल कोर्ट से बरी नहीं हुए हैं, जमानत पर बाहर हैं। 

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मेवालाल चौधरी 2010 से 2015 तक सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति थे। इसी दौरान उनके ऊपर भर्ती प्रक्रिया में धांधली करने के आरोप लगे थे। ख़ास बात यह है कि मेवालाल चौधरी को जेडीयू ने पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया था। लेकिन उन्हीं चौधरी को इस बार मंत्री पद दे दिया गया था। अब भी जेडीयू विधायक मेवालाल चौधरी के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 46,7 468, 471 और 120 बी के तहत भ्रष्टाचार के मुकदमे दर्ज हैं। इनके खिलाफ अभी भागलपुर के एडीजे-1 की अदालत में मामला लंबित है।