विधान परिषद की सीटों को अनिश्चित समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता, बॉम्बे हाई कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

नामांकन पर एक निश्चित समय में फैसला लेना राज्यपाल का कर्तव्य, 8 महीने से लंबित है फ़ैसला 

Updated: Aug 14, 2021, 09:35 AM IST

विधान परिषद की सीटों को अनिश्चित समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता, बॉम्बे हाई कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी
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मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि विधान परिषद में सीटों को अनिश्चित समय तक खाली नहीं रखा जा सकता। दरअसल नवंबर 2020 में महाराष्ट्र मंत्रिपरिषद ने महाराष्ट्र विधान परिषद में 12 व्यक्तियों को नामित करने का एक प्रस्ताव राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा था। जिस पर 8 महीने से कोई निर्णय राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की ओर से नहीं लिया गया। इस सम्बन्ध में एक याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की गई थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने ये टिप्पणी की है।  

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी की खंडपीठ ने कहा कि उचित समय में विधान परिषद सदस्यों के लिए भेजे गए नामांकनों को स्वीकार या अस्वीकार करना महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी का संवैधानिक दायित्व है। दो सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि मंत्रिपरिषद द्वारा राज्यपाल को नामांकित सदस्यों की सूची भेजे 8 माह हो चुके हैं।  ऐसे में ये उचित समय है कि राज्यपाल इस बेहद महत्वपूर्ण मामले पर अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए फैसला लें। विधान परिषद की सीटों को लम्बे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में राज्यपाल को कोई निर्देश देने से इंकार कर दिया। 

इस मामले में नाशिक के रतन सोली लुथ ने एक याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल की है। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये टिप्पणी की।न्यायाधीशों ने कहा कि राज्यपाल अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं है और हमें उम्मीद है कि संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन पूरी तरह से हो रहा है। कोर्ट ने कहा  कि राज्यपाल का यह कर्तव्य  है कि मंत्रिपरिषद द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव पर उचित समय के भीतर अपने विचारों से मुख्यमंत्री को अवगत कराएं क्योंकि इस गतिरोध को दूर करना जरूरी है। 

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित 12 सदस्यों को विधान परिषद के लिए नामित करने का एक प्रस्ताव राज्यपाल के पास महाराष्ट्र मंत्रिपरिषद ने 8 माह पहले भेजा था जिस पर अब तक  कोई निर्णय राज्यपाल ने नहीं लिया है।