उच्च न्यायालयों में मीडिया को रिपोर्टिंग से रोका नहीं जा सकता, चुनाव आयोग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को राजनीतिक रैलियों में हुए कोरोना के नियमों के उल्लंघन पर फटकार लगाई थी, मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग के अधिकारियों पर इसके लिए हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी मद्रास हाई कोर्ट के इसी टिप्पणी और मीडिया रिपोर्टिंग के संदर्भ में की है

Updated: May 03, 2021, 12:49 PM IST

उच्च न्यायालयों में मीडिया को रिपोर्टिंग से रोका नहीं जा सकता, चुनाव आयोग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज चुनाव आयोग की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मीडिया को उच्च न्यायालयों की टिप्पणियों की रिपोर्टिंग करने से रोका नहीं जा सकता। पिछले दिनों चुनाव आयोग को मद्रास हाई कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी, जिसकी मीडिया में रिपोर्टिंग होने पर चुनाव आयोग इतना आहत हो गया कि आयोग ने मीडिया की रिपोर्टिंग को रोकने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की याचिका को मानने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। 

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई करने वाली जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र की प्रहरी है। कोर्ट में होने वाली मौखिक टिप्पणियों की भी रिपोर्टिंग करने से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने कहा, लिहाज़ा यह याचिका कि मीडिया को रिपोर्टिंग करने से रोका जाए, बिल्कुल सही नहीं है। इसलिए हम मीडिया को रिपोर्टिंग करने से नहीं रोक सकते। 

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दरअसल हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हुई रैलियां और उनमें कोरोना नियमों की उड़ी धज्जियां को लेकर चुनाव आयोग को खूब खरी खोटी सुनाई थी। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि जब रैलियों में इतनी भीड़ जुटाई जा रही थी तब क्या चुनाव आयोग दूसरे गृह पर गया हुआ था? मद्रास हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि कोरोना नियमों की हुई अनदेखी के लिए आयोग पूर्णतः ज़िम्मेदार है, लिहाज़ा आयोग के अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। 

कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी जल्द ही मीडिया की सुर्खियां बन गई। चुनाव आयोग को मीडिया की सुर्खियां रास नहीं आईं और आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हाथों भी आयोग को निराशा ही हाथ लगी।