नहीं रहे बंगाल की सियासत के चाणक्य, देश के पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का 71 वर्ष की उम्र में निधन

मुकुल रॉय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते थे और तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक मजबूती में उनकी अहम भूमिका रही।

Updated: Feb 23, 2026, 10:57 AM IST

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति के बड़े चेहरा और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार तड़के निधन हो गया। कोलकाता के एक अस्पताल में उन्होंने रात करीब 1:30 बजे अंतिम सांस ली। 71 वर्ष के रॉय लंबे समय से डिमेंशिया समेत कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे और लंबे समय तक उनके रणनीतिकार के रूप में जाने गए। उन्होंने बंगाल में यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और बाद में ममता बनर्जी के साथ मिलकर 1998 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना करने वालों में शामिल रहे।

तृणमूल कांग्रेस में मुकुल रॉय को संगठन महासचिव बनाया गया और वे धीरे-धीरे पार्टी के ‘नंबर दो’ नेता के तौर पर उभरे। 2011 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत के पीछे उनकी रणनीति को अहम माना गया, जब पार्टी ने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन का अंत किया।

संसद में भी मुकुल रॉय की भूमिका अहम रही। वे 2006 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 2012 तक तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता रहे। यूपीए-2 सरकार में उन्होंने पहले जहाजरानी राज्य मंत्री के रूप में काम किया और बाद में 2011 से 2012 के बीच रेल मंत्री का दायित्व संभाला। उन्होंने यह पद पार्टी के ही नेता दिनेश त्रिवेदी की जगह लिया था। इसके अलावा वे शहरी विकास मंत्रालय से भी जुड़े रहे।

मुकुल रॉय ने 2011 के बाद पार्टी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। 2015 तक महासचिव रहते हुए उन्होंने सीपीएम और कांग्रेस से बड़े पैमाने पर नेताओं को तृणमूल कांग्रेस में शामिल करवाया। हालांकि बाद के वर्षों में उनका नाम शारदा चिटफंड घोटाले और नारदा स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ने के बाद विवादों में आ गया। पार्टी नेतृत्व से दूरी बढ़ने के बीच उन्हें 2017 में तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद नवंबर 2017 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली।

बीजेपी में रहते हुए मुकुल रॉय ने पश्चिम बंगाल में पार्टी का संगठन मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को राज्य में 18 सीटें दिलाने में उनकी रणनीति को महत्वपूर्ण माना गया। वे 2020 में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर से चुनाव जीता।

हालांकि चुनाव के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने जून 2021 में फिर से तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली। इसके बाद वे सक्रिय राजनीति में पहले जैसी भूमिका में नजर नहीं आए। स्वास्थ्य समस्याओं के चलते वे काफी हद तक सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। उनके निधन से पक्षिम बंगाल की सियासत में शोक की लहर दौड़ गई है।