जबलपुर में भरभराकर गिरी 5 मंजिला जर्जर इमारत, बाजार बंद होने से टला बड़ा हादसा
मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार शाम 40 साल पुरानी 5 मंजिला इमारत भरभराकर ढह गई। गनीमत रही कि बाजार बंद होने से बड़ा हादसा टल गया और कोई जनहानि नहीं हुई।
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में मंगलवार शाम बड़ा हादसा होते-होते टल गया। शहर के व्यस्त बड़ा फुहारा इलाके में स्थित करीब 40 साल पुरानी पांच मंजिला जर्जर इमारत शाम करीब 7:30 बजे अचानक ढह गई। राहत की बात यह रही कि उस दिन बाजार बंद होने के कारण इमारत के भीतर कोई मौजूद नहीं था जिससे जनहानि नहीं हुई। हालांकि, इमारत गिरने के बाद पूरे इलाके में तेज धमाके के साथ अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ वहां सामान्य दिनों में देर रात तक लोगों की आवाजाही रहती है और सड़क किनारे कई ठेले भी लगते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह घटना किसी अन्य दिन या कुछ समय पहले होती तो बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था।
कोतवाली थाना प्रभारी मानस द्विवेदी के अनुसार, बड़ा फुहारा क्षेत्र में स्थित यह इमारत राजा जैन की है। भवन के निचले हिस्से में दुकान संचालित होती थी। जबकि, ऊपरी मंजिलों का उपयोग गोदाम के रूप में किया जाता था। मंगलवार शाम अचानक पूरी इमारत एक साथ भरभराकर गिर गई। बाजार बंद होने के कारण दुकान भी बंद थी और अंदर कोई कर्मचारी या अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। जिसकी वजह से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली।
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हादसे के समय तेज धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी थी। जिसके बाद आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर लोगों को मलबे से दूर किया गया। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के क्षेत्र में आवाजाही भी नियंत्रित कर दी।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के समय सड़क किनारे सब्जी, फल और अन्य सामान के कई ठेले लगे हुए थे। सौभाग्य से इमारत का मलबा सीधे ठेलों पर नहीं गिरा जिससे बड़ा नुकसान टल गया। हालांकि, मलबे की चपेट में आने से आसपास की कुछ दुकानों का सामान क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से कुछ मिनट पहले इमारत के नीचे कुछ लोग खड़े थे लेकिन बारिश शुरू होने पर वे वहां से हट गए। उनके हटने के कुछ ही देर बाद पूरी इमारत ढह गई।
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घटना की जानकारी मिलते ही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भोपाल से जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार से फोन पर चर्चा कर हालात की जानकारी ली। उन्होंने बड़ा फुहारा समेत शहर की पुरानी बस्तियों में स्थित जर्जर भवनों का सर्वे कराने और लोगों के लिए खतरा बने भवनों पर समय रहते आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
दूसरी ओर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अमरीष मिश्रा ने इस घटना को लेकर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई मकान मालिक अपने जर्जर भवनों को गिराने की अनुमति के लिए आवेदन दे चुके हैं लेकिन नगर निगम समय पर न तो अनुमति देता है और न ही आवश्यक कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि मंगलवार होने के कारण उस समय भीड़ अपेक्षाकृत कम थी लेकिन यदि किसी अन्य दिन यह इमारत गिरती तो दर्जनों लोगों की जान जा सकती थी और सैकड़ों लोग घायल हो सकते थे।
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वहीं, भवन मालिक का कहना है कि आसपास की इमारतों को पहले ही तोड़ दिया गया था जिससे उनकी इमारत को मिलने वाला सहारा समाप्त हो गया और करीब चार दशक पुराना यह भवन अचानक ढह गया। फिलहाल प्रशासन ने मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया है और समाचार लिखे जाने तक सड़क पर फैले मलबे को हटाने की कार्रवाई जारी थी। साथ ही इमारत गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन आसपास की अन्य पुरानी इमारतों की भी सुरक्षा जांच करा रहा है ताकि किसी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।




