Digvijaya Singh: ऑक्सीजन सिलेंडर को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अधीन लाएं

Rajya Sabha: सांसद दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में उठाया ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा, देश में ऑक्सीजन की कालाबाजारी, ऑक्सीजन की कमी से हो रही मरीजों की मौत

Updated: Sep 17, 2020 02:05 AM IST

Digvijaya Singh: ऑक्सीजन सिलेंडर को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अधीन लाएं

नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में कोरोना पर चर्चा के दौरान ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर के लगातार बढ़ते दामों और इसकी वजह से एमपी के देवास सहित अन्य स्थानों पर कोरोना मरीज़ों की मौत का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम को बदल रही हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर को भी इसके अंतर्गत लाया जाना चाहिए।

सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोरोना के इलाज के लिए ऑक्सीजन बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन महामारी के पहले ऑक्सीजन की कीमत 10 रुपये प्रति घन मीटर थी जो अब बढ़कर 50 रुपये प्रति घन मीटर हो गई है। जबकि इसकी क़ीमत की अधिकतम सीमा 17 रुपए प्रति घन मीटर तय की गई थी। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित देश में प्रायवेट अस्पताल इससे कहीं ज़्यादा पैसा वसूल रहे हैं। एमपी के देवास में ऑक्सीजन की कमी के कारण चार लोगों की मौत हो गई है। देवास, दमोह, जबलपुर, छिंदवाड़ा में ऑक्सीजन नहीं मिल रही है।ऑक्सीजन नहीं मिलने से लोग मरने की कगार पर पहुंच गए हैं।

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सांसद सिंह ने कहा कि यूपी में जो छोटा सिलेंडर 130 रुपए में आता था वह 350 रुपए में बिक रहा है। ऑक्सीजन लेने पर लिए जाने वाली सिक्यूरिटी राशि को पांच हजार से बढ़ा कर दस हज़ार कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य गुजरात में ऑक्सीजन की क़ीमत 8.50 रुपए प्रति लीटर थी। यह अब बढ़ कर 28 रुपए तक हो गई है। उड़ीसा में एक सिलेंडर साढ़े छह हज़ार में आता था अब दस हज़ार में आ रहा है। सभी राज्यों में ऑक्सीजन की क़ीमत बढ़ती जा रही है। 

 

उन्होंने कहा कि लोग परेशान हैं। सरकार को ऑक्सीजन की कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। आवश्यक वस्तु अधिनियम को बदलने के समय में ऑक्सीजन पर सीलिंग लागू करनी चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने अपने पांच पेज जितने लंबे भाषण में प्रधानमंत्री का तो बार बार उल्लेख किया मगर ऑक्सीजन की कमी की बात नहीं की। मैं इसकी निंदा करता हूं। 

ग़ौरतलब है कि मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों में कोरोना के इलाज के लिए ऑक्सीजन की मांग लगातार बढ़ रही है। एमपी में कोरोना इलाज के दौरान अस्पतालों में जुलाई में हर दिन 40 टन ऑक्सीजन की मांग थी जो अगस्त में 90 टन हुई। सितंबर में हर दिन 1500 से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में ऑक्सीजन खपत 130 टन हो गई है। सितंबर अंत और अक्टूबर मध्य तक प्रतिदिन की खपत 150 टन तक पहुंचने की संभावना है। ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए भोपाल कलेक्टर ने आदेश जारी किया कि कोविड की स्थिति सामान्य होने तक कमर्शियल इस्तेमाल के लिए ऑक्सीजन नहीं दी जाएगी। 

हिंदुस्तान समाचार पत्र के अनुसार उत्तर प्रदेश के अकेले कानपुर में रोज 2500 ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग थी जो अब बढ़ कर 10 हजार सिलेंडर तक पहुंच गई है। इससे दूसरे शहरों की स्थिति समझी जा सकती है। महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ती मांग को देखते हुए अन्य राज्यों को ऑक्सीजन सप्लाय रोक दी है। महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय से एमपी जैसे राज्यों में ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो गया।