दुष्यंत चौटाला का इस्तीफ़ा मेरी जेब में, पिता अजय चौटाला का बड़ा बयान

JJP अध्यक्ष अजय चौटाला ने कहा, अगर दुष्यंत के इस्तीफे से समाधान निकलता है तो 5 मिनट भी नहीं लगाएंगे, लेकिन साथ ही इस्तीफ़ा नहीं देने के पक्ष में कई दलीलें भी दे डालीं

Updated: Feb 13, 2021, 08:26 PM IST

दुष्यंत चौटाला का इस्तीफ़ा मेरी जेब में, पिता अजय चौटाला का बड़ा बयान
Photo Courtesy: Jagaran

चंडीगढ़। हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के पिता और जेजेपी के अध्यक्ष अजय चौटाला ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि बेटे दुष्यंत का सरकार से इस्तीफा उनकी जेब में है, अगर उससे किसान आंदोलन का हल निकलता हो, तो वो ऐसा करने में पांच मिनट भी नहीं लगाएंगे। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि किसानों का मसला दुष्यंत के इस्तीफ़ा देने से दूर नहीं होगा।

दरअसल,  जेजेपी के नेताओं को राज्य में कृषि क़ानून विरोधी आंदोलन की वजह से भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा के किसान चौटाला परिवार पर सत्तारूढ़ बीजेपी से नाता तोड़ने के लिए दबाव बना रहे हैं। बार-बार माँग उठ रही है कि जिस तरह पंजाब में शिरोमणि अकाली दल ने कृषि क़ानूनों का विरोध करते हुए मोदी सरकार से इस्तीफ़ा दे दिया, वैसे ही जेजेपी को भी बीजेपी से नाता तोड़कर खट्टर सरकार को समर्थन वापस ले लेना चाहिए। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के विधायक अभय सिंह चौटाला के विधानसभा से इस्तीफा देने के बाद तो दुष्यंत चौटाला और अजय सिंह चौटाला पर सरकार का साथ छोड़ने के लिए और ज़्यादा दबाव पड़ने लगा है।

अभय चौटाला ने कृषि कानूनों के विरोध और किसान आंदोलन के समर्थन में 11 जनवरी को इस्तीफ़ा दे दिया था, जिसे हरियाणा विधानसभा के स्पीकर ने स्वीकार भी कर लिया। इस्तीफा देने के बाद अभय चौटाला ने कहा था कि मुझे कुर्सी नहीं मेरे देश का किसान खुशहाल चाहिए। साथ ही उन्होंने नाम लिए बिना ही जेजेपी के नेताओं की तरफ़ ये चुनौती भी उछाल दी थी कि उम्मीद है देश का हर किसान पुत्र राजनीति से ऊपर उठकर किसानों का समर्थन करेगा। लेकिन अजय चौटाला के जवाब से साफ़ है कि वो किसानों के समर्थन के चक्कर में सत्ता की मलाई से हाथ नहीं धोना चाहते।

सत्ता की इसी ललक को तर्कों का सहारा देने के लिए अब अजय चौटाला कह रहे हैं कि अगर किसान आंदोलन का हल निकले तो उनकी पार्टी फौरन सरकार से अलग होकर इस्तीफा दे देगी। अपनी राजनीतिक पोजिशन को सही साबित करने की कोशिश में वे यह भी कह रहे हैं कि “अभय सिंह चौटाला के इस्तीफे से कुछ हल निकला है क्या, दुष्यंत चौटाला का इस्तीफा मेरी जेब में है, अगर उससे हल निकलता है तो मैं अभी दे देता हूं। क़ानून केंद्र का बनाया हुआ है। केंद्र फ़ैसला करे या हरियाणा के 10 सांसद इस्तीफा दें, जिन्होंने इसमें सहमति दी थी।”

वे यह सलाह भी दे रहे हैं कि किसानों को सरकार से सकारात्मक बातचीत करके और एक कदम पीछे हटकर मसले का समाधान निकालना चाहिए। शिरोमणि अकाली दल की तरह सरकार से अलग होने का दबाव पड़ने की वजह से वो यह भी कह रहे हैं कि सांसदों के इस्तीफे से तो केंद्र सरकार पर फर्क पड़ सकता है, लेकिन हरियाणा के किसी मंत्री के इस्तीफा देने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हालाँकि सच यह है कि अकाली दल के इस्तीफ़ा देने से भले ही मोदी सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा हो, लेकिन हरियाणा में जेजेपी के अलग होने से खट्टर सरकार ख़तरे में पड़ सकती है। ऐसे में उनके अलग होने से बीजेपी पर ज़्यादा दबाव पड़ सकता है। लेकिन अजय चौटाला लगातार बात को अलग मोड़ देने की कोशिश कर रहे हैं।

बहरहाल, कुल मिलाकर अजय चौटाला की दलीलों का सीधा मतलब इतना ही है कि वे हरियाणा की सत्ता में भागीदार तो बने रहना चाहते हैं, लेकिन साथ ख़ुद को किसानों का पक्षधर भी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि हरियाणा में किसानों के मौजूदा मूड को देखते हुए लगता नहीं कि वे अपनी इस कोशिश में सफल हो पाएँगे।