मोबाइल ऐप से इंस्टेंट लोन देने के करोड़ों के घोटाले का भंडाफोड़, RBI ने दी चेतावनी

हैदराबाद-गुरुग्राम का है मामला, कर्ज न चुका पाने पर उधार देने वालों के उत्पीड़न और यातनाओं से परेशान होकर 3 लोगों के ख़ुदकुशी करने के बाद तेलंगाना पुलिस हुई अलर्ट

Updated: Dec 24, 2020, 02:36 PM IST

मोबाइल ऐप से इंस्टेंट लोन देने के करोड़ों के घोटाले का भंडाफोड़, RBI ने दी चेतावनी
Photo Courtesy: NDTV

हैदराबाद/गुरुग्राम। करोड़ों के मनी लॉड्रिंग मामले में हैदराबाद पुलिस ने 75 बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया है। इन खातों में कुल 423 करोड़ रुपए हैं। ये कर्जदाता ऋण की रकम पर 35 फीसदी तक ब्याज वसूल रहे थे। यह कर्ज 30 मोबाइल ऐप के जरिये बांटा जा रहा था और इन ऐप संचालकों ने रिजर्व बैंक (RBI) से कोई मंजूरी नहीं ली थी। कर्ज न चुका पाने पर उधार देने वालों के उत्पीड़न और यातनाओं से परेशान होकर 3 लोगों ने खुदकुशी कर ली, जिसके बाद तेलंगाना पुलिस को अलर्ट किया गया था।

इस हाई प्रोफाइल लोन घोटाले में जांच एजेंसियों ने गुरुग्राम और हैदराबाद में छापेमारी कर 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। घोटाले के बारे में खुलासा हुआ कि मोबाइल ऐप के जरिए कर्ज देने के लिए 3 विभिन्न कॉल सेंटर्स में करीब एक हजार लोगों को नौकरी पर रखा गया था। इनमें ज्यादातर लोग कॉलेज स्टूडेंट्स थे। यह कॉल सेंटर्स भी गुरुग्राम और हैदराबाद में ही बनाए गए थे। आरबीआई ने बिना मंजूरी लोन बांटने वाली ऐसी कंपनियों से लोगों को सावधान रहने को कहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पूरे चिटफंड कारोबार में अमेरिका से इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर लौटा एक युवक भी शामिल है। 32 साल का शरत चंद्र दो कंपनियों ओनियन क्रेडिट प्रा.लि. और क्रेड फॉक्स टेक्नोलॉजीज़ के जरिये कर्ज बांटने का यह कारोबार चलाता था। ऐप के जरिये कर्ज देने का यह कारोबार 2018-19 से शुरू हुआ। शरत चंद्र लोन देने वाले ऐसे ऐप बनाकर बेंगलुरु में कई कंपनियों को बेचता भी था। 

अधिकारियों का कहना है कि कॉल सेंटर में युवाओं को ट्रेनिंग दी गई थी कि कैसे ग्राहकों को उधार लेने के लिए लुभाना है। उन्हें यह भी सिखाया गया था कि कर्ज की रकम न चुकाने पर उन्हें किस तरह प्रताड़ित, बदनाम या ब्लैकमेल करना है, ताकि भारी ब्याज के साथ रकम वसूली जा सके। कॉल सेंटर में कर्मचारियों को हर माह 10 से 15 हजार रुपये दिए जाते थे। 

खास बात यह है कि जालसाजों ने युवाओं और ऑनलाइन ऐप के जरिये लोगों को कर्ज के जाल में फंसाने का यह धंधा ऐसे वक्त शुरू किया, जब कोरोना के कारण बड़े पैमाने पर बेरोजगारी फैली है। लोग नए धंधे के लिए कर्ज लेने को बेताब हैं, वहीं युवा कोई भी नौकरी पाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं।