अजेय योद्धा वाली रही है छवि, 50 साल के करियर में सिर्फ एक बार ही हारे हैं चुनाव, जानें खड़गे का सियासी सफर

कर्नाटक में गुलबर्गा जिले के रहने वाले खड़गे लगातार 9 बार विधायक रह चुके हैं, जबकि केंद्र सरकार में रेल मंत्री भी रह चुके हैं

Updated: Oct 19, 2022, 04:07 PM IST

अजेय योद्धा वाली रही है छवि, 50 साल के करियर में सिर्फ एक बार ही हारे हैं चुनाव, जानें खड़गे का सियासी सफर

नई दिल्ली। मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के नए अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। पार्टी के आंतरिक चुनाव में उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की है। चुनावों में खड़गे की छवि अजेय योद्धा वाली रही है। कर्नाटक में वह "सोलिलाडा सरदारा (A leader without defeat)" के नाम से लोकप्रिय हैं।

80 साल के मल्लिकार्जुन खड़गे पांच दशक से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत मजदूर यूनियन लीडर के तौर पर की थी। इसके बाद से उनका ग्राफ लगातार चढ़ता गया। वर्ष 1969 में कांग्रेस से जुड़े। इसके बाद उन्होंने गुलबर्गा सिटी कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष, कर्नाटक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर तय किया।

कर्नाटक के गुरमिटकल विधानसभा सीट से लगातार 9 बार चुनाव जीतने की उपलब्धि मल्लिकार्जन खड़गे के नाम पर है। 2008 के विधानसभा चुनावों के दौरान वह कर्नाटक कांग्रेस प्रदेश कमिटी के प्रमुख रहे। इसके पहले उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी संभाला। साल 2009 में वह लोकसभा चुनाव में उतरे और यूपीए टू सरकार में रेल मंत्री और श्रम मंत्री बने। साल 2014 में भी वे चुनाव जीतने में कामयाब रहे। इसके बाद कांग्रेस ने लोकसभा में उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया।

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खड़गे पहली बार 2019 में चुनाव हारते हैं। इसके बाद उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया जाता है। साथ ही सदन में नेता प्रतिपक्ष की भी जिम्मेदारी दी गई। स्वभाव से शांत खड़गे कभी भी किसी राजनीतिक संकट या विवादों में नहीं रहे। गुलबर्गा जिले के वारवट्टी में एक गरीब परिवार में जन्मे थे। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और बीए के साथ-साथ गुलबर्गा में कानून की पढाई की। राजनीति में आने से पहले वह कुछ समय के लिए वह कुछ समय तक वकालत भी करते थे। 

कांग्रेस पार्टी में आने के बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। खड़गे ने पहली बार 1972 में विधानसभा में प्रवेश किया था जब वे गुरमीतकल निर्वाचन क्षेत्र से जीते थे और 1976 में प्राथमिक शिक्षा राज्य मंत्री के रूप में देवराज उर्स सरकार के सदस्य बने थे। उन्होंने 1980 में गुंडू राव मंत्रालय में भी काम किया, जिसके दौरान प्रभावी भूमि सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने एक ट्राइब्यूनल का गठन किया गया था ताकि भूमि अधिकार किसानों को ट्रासंफर किया जा सके।

खड़गे ने 2019 में राज्यसभा चुनाव के दौरान इलेक्शन कमीशन को बताया था कि उनके पास करीब 20 करोड़ रुपये की संपत्ति है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने जो हलफनामा दिया था उसके मुताबिक उनके पास अपने नाम पर कोई गाड़ी नहीं है। खड़गे की पत्नी हाउसवाइफ हैं। उनके नाम पर भी कोई गाड़ी नहीं है। कई राजनेता अपनी सुरक्षा के लिए असलहे भी रखते हैं वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे के पास किसी तरह का कोई हथियार नहीं है।