जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को मिली पहली महिला कुलपति, JNU की पूर्व छात्रा रही हैं प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी

सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की वर्तमान प्रोफेसर हैं शांतिश्री धूलिपुडी पंडित, राजनीति और लोक प्रशासन विभाग की प्रोफेसर कई भाषाओं की जानकार हैं, JNU से एमफिल और PHD की उपाधि हासिल की है

Updated: Feb 07, 2022, 12:53 PM IST

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को मिली पहली महिला कुलपति,  JNU की पूर्व छात्रा रही हैं प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी
Photo Courtesy: Amar Ujala

भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी की कमान पहली बार महिला को सौंपी जा रही है। प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित को जेएनयू का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पहली महिला कुलपति होंगी। JNU की पूर्व छात्रा रहीं प्रोफेसर शांतिश्री पंडित वर्तमान में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में राजनीति और लोक प्रशासन विभाग में प्रोफेसर हैं। प्रोफेसर शांतिश्री ने JNU से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एमफिल और भारतीय संसद एवं विदेश नीति पर PHD किया है। उन्होंने अमेरिका की जानीमानी कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में डिप्लोमा भी किया है। वे अलावा इतिहास और सामाजिक मनोविज्ञान में ग्रेजुएट हैं। उन्होंने राजनीति विज्ञान में MA प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास से किया है। वे 6 भाषाओं की जानकार हैं। वे हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, संस्कृत, तमिल और तेलुगु भाषाओं में पारंगत हैं।

 प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने 1988 में गोवा यूनिवर्सिटी से अपने अध्यापन करियर की शुरूआत की थी। 1993 से वे पुणे विश्वविद्यालय से जुड़ी हैं। वर्तमान में वे पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। अब उन्हें  केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने JNU का कुलपति नियुक्त किया है। शांतिश्री राजनीति एवं लोक प्रशासन विभाग की प्रोफेसर हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर एम जगदीश कुमार को यूजीसी का चेयरमैन नियुक्त किए जाने के बाद से यह पद खाली था।

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प्रोफेसर जगदीश कुमार का कार्यकाल पूरा हो चुका था, वे तब से कार्यवाहक कुलपति की जिम्मेदारी निभा रहे थे। JNU के कुलपति के तौर पर प्रोफेसर जगदीश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2021 को समाप्त हो गया था। जल्द ही शांतिश्री धूलिपुडी अपना पदभार ग्रहण करेंगी, ज्वाइनिंग के दिन से अगले 5 साल तक वे इस पद पर रहेंगी। JNU को मिली पहली महिला कुलपति से छात्रों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।