Mamata Banerjee: जीएसटी मुआवजा नहीं देना केंद्र सरकार का विश्वासघात

GST Compensation: केंद्र सरकार ने जीएसटी मुआवजे की भरपाई के लिए राज्यों को दिए हैं उधार लेने के दो विकल्प, आठ गैर-बीजेपी शासित राज्य पहले ही नकार चुके हैं केंद्र का प्रस्ताव

Updated: Sep 02, 2020 07:19 PM IST

Mamata Banerjee: जीएसटी मुआवजा नहीं देना केंद्र सरकार का विश्वासघात
Photo Courtesy: the prevalent india

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में कहा कि राज्यों को जीएसटी राजस्व के मुआवजे से वंचित करना देश की संघीय व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को जीएसटी मुआवजा भरपाई के लिए उधार लेने का प्रस्ताव देना विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दो विकल्प राज्य सरकारों के सामने रखे हैं, उनमें दोनों के तहत राज्य सरकारों को लाखों करोड़ों का उधार लेना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के पास कर्मचारियों को वेतन देने के भी पैसे नहीं बचे हैं। 

प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर राज्यों और केन्द्र के बीच के विश्वास को नहीं तोड़ने का अनुरोध करते हुए बनर्जी ने उनसे कहा, ‘‘राज्यों को जीएसटी राजस्व मुआवजे से वंचित करके देश की संघीय राजनीतिक व्यवस्था को असहनीय आघात ना पहुंचाएं।’’

साथ ही मुख्यमंत्री ने लिखा है कि 'सहमति के फार्मूले' के तहत कर लगाने के अधिकार को छोड़ने के लिए जीएसटी संग्रह में आने वाली कमी की अगले पांच साल तक पूरी भरपाई का वादा किया गया था। बनर्जी ने पूछा कि क्या इस संकट में राज्य सरकारों की सहायता करने की जगह उनके ऊपर और वित्तीय दबाव डालना जायज है? 

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बनर्जी ने प्रधानमंत्री को वह समय भी याद दिलाया जब वे गुरजात के मुख्यमंत्री के तौर पर जीएसटी के खिलाफ थे। उन्होंने देश के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का दिसंबर 2013 का एक भाषण याद दिलाते हुए कहा कि वे कहा करते थे कि भारतीय जनता पार्टी केवल इसलिए जीएसटी का समर्थन नहीं कर रही है क्योंकि उसे तत्कालीन केंद्र सरकार पर भरोसा नहीं था। 

दरअसल, पिछले सप्ताह हुई जीएसटी परिषद की बैठक ने केंद्र सरकार ने राज्यों को जीएसटी भरपाई के लिए दो विकल्प दिए हैं। इन दोनों ही विकल्पों में राज्यों को अपने 2.35 लाख करोड़ के जीएसटी मुआवजे की भरपाई के लिए उधार लेना पड़ेगा। अभी तक आठ गैर-बीजेपी शासित राज्य इन विकल्पों को खारिज कर चुके हैं। ये आठ राज्य पंजाब, पश्चिम बंगाल, केरल, दिल्ली, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना, राजस्थान और पुडुचेरी हैं।