मैंने राष्ट्रपति पुतिन को यूक्रेन के राष्ट्रपति से बातचीत का सुझाव दिया: जो बाइडेन से बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सोमवार को वर्चुअल मीटिंग की, इस दौरान दोनों नेताओं ने यूक्रेन संकट को लेकर चर्चा किया

Updated: Apr 12, 2022, 08:59 AM IST

मैंने राष्ट्रपति पुतिन को यूक्रेन के राष्ट्रपति से बातचीत का सुझाव दिया: जो बाइडेन से बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति सोमवार को वर्चुअल मीटिंग में एक-दूसरे से रूबरू हुए। इस दौरान यूक्रेन संकट के अलावा दक्षिण एशिया का विकास, इंडो-पैसेफिक की हालात और द्विपक्षीय सहयोग चर्चा का अहम मुद्दा रहे। 

अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडेन से चर्चा के दौरान पीएएम मोदी ने कहा, 'आज की हमारी बातचीत ऐसे समय पर हो रही है जब यूक्रेन में स्थिति बहुत चिंताजनक बनी हुई है। कुछ सप्ताह पहले तक, 20,000 से अधिक भारतीय यूक्रेन में फंसे हुए थे। और इनमें से अधिकांश युवा छात्र थे। मैंने यूक्रेन और रूस, दोनों के राष्ट्रपतियों से कई बार फ़ोन पर बातचीत की। मैंने न सिर्फ़ शांति की अपील की, बल्कि मैंने राष्ट्रपति पुतिन को यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ सीधी बातचीत का सुझाव भी दिया। हमारी संसद में भी यूक्रेन के विषय पर बहुत विस्तार से चर्चा हुई है।'

पीएम मोदी ने आगे कहा कि, 'हाल में Bucha शहर में निर्दोष नागरिकों की हत्याओं की खबर बहुत ही चिंताजनक थी। हमने इसकी तुरंत निंदा की और एक निष्पक्ष जाँच की मांग भी की है। हम आशा करते हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रही बातचीत से शांति का मार्ग निकलेगा। हमने यूक्रेन में civilian जनता की सुरक्षा और उनको मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति पर भी महत्त्व दिया है। हमने अपनी तरफ से दवाइयां व अन्य राहत सामग्री यूक्रेन और उसके पड़ोसी देशों को भेजी है। और यूक्रेन की मांग पर हम शीघ्र ही दवाइयों का एक और कन्साइनमेंट भेज रहे हैं।'

पीएम मोदी ने कहा कि, 'पिछले साल सितम्बर में जब मैं वाशिंगटन आया था, तब आपने कहा था कि भारत-अमेरिका पार्टनरशिप बहुत सी वैश्विक समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकती है। मैं आपकी बात से पूर्णतया सहमत हूँ। विश्व के दो सबसे बड़े और पुराने लोकतंत्रों के रूप में, हम नेचुरल पार्टनर्स हैं। आपने अपने कार्यकाल के शुरू में ही एक बहुत महत्वपूर्ण स्लोगन दिया था "Democracies can Deliver" भारत और अमेरिका की पार्टनरशिप की सफलता इस स्लोगन को सार्थक करने का सबसे उत्तम जरिया है।'