पेगासस जासूसी कांड पर पत्रकार एन राम की याचिका मंजूर, CJI की बेंच अगले हफ्ते से करेगी सुनवाई

पेगासस जासूसी कांड को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे को चीफ जस्टिस रमन्ना के सामने उठाया, जिसके बाद चीफ जस्टिस इस मामले की सुनवाई पर अगले हफ्ते से तैयार हो गए

Updated: Jul 30, 2021, 05:51 PM IST

पेगासस जासूसी कांड पर पत्रकार एन राम की याचिका मंजूर, CJI की बेंच अगले हफ्ते से करेगी सुनवाई

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी कांड से जुड़ी एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। खुद चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। अगले हफ्ते से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है। 

वरिष्ठ पत्रिका एन राम और शशि कुमार की याचिका को सर्वोच्च अदालत ने स्वीकार कर लिया है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को यह मामला चीफ जस्टिस के सामने उठाया था। जिसके बाद चीफ जस्टिस अगले हफ्ते से इस मामले की सुनवाई के लिए तैयार हो गए हैं। याचिका में पेगासस जासूसी कांड की सुप्रीम कोर्ट के जज या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच कराने की मांग की गई है। 

पेगासस जासूसी कांड भारतीय पत्रकारों, राजनेताओं सहित कई नामी हस्तियों की फोन हैकिंग से जुड़ा हुआ है। दुनिया के करीब पचास देशों पर इजराइली कंपनी NSO की पेगासस स्पायवेयर के जरिए जासूसी कराए जाने का आरोप लगा है। कुल 16 मीडिया संस्थानों ने मिलकर दुनियाभर के अनेक देशों में चल रहे इस जासूसी कांड का खुलासा किया है। जासूसी कांड की जांच को लेकर विपक्ष भी लगातार हमलावर है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष इस मामले में केंद्र सरकार से संसद के अंदर जवाब मांग रहा है। राहुल गांधी यह कह चुके हैं कि केंद्र की मोदी सरकार पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल विपक्ष के खिलाफ हथियार की तरह कर रही है, ताकि जनता की आवाज़ उठानेवालों को दबाया जा सके।

कुछ राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर इस जासूसी कांड की जांच का एलान किया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच करने की मांग की है। साथ ही अपने राज्य, पश्चिम बंगाल में दो रिटायर्ड जजों की कमेटी गठित कर इसकी जांच का एलान भी कर दिया है। ममता बनर्जी के भतीजे, अभिषेक बनर्जी के फोन में पेगागस सॉफ्टवेयर के जरिए जासूसी का मामला सामने आ चुका है। 

विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है कि सरकार बताए कि ये जासूसी हुई या नहीं और किसने जासूसी करायी। लेकिन सरकार ने इस मामले पर संसद में चर्चा से ही इनकार कर दिया है। हालांकि दुनिया के अनेक देश इसकी जांच करा रहे हैं। फ्रांस ने तो इस मामले पर इज़रायल के रक्षा मंत्री को भी तलब किया है। गौरतलब है कि पेगागस सॉफ्टवेयर इजरायल का है, जो सरकारी अनुमति के बिना इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।