कैबिनेट मंत्रियों और RSS नेताओं के फोन टैपिंग की खबरों के बीच जानें क्या है पेगासस स्पाईवेयर, कैसे होता है कंट्रोल

देशभर में पेगासस स्पाईवेयर को लेकर मचा हड़कंप,  केंद्र की मोदी सरकार पर बड़े नेताओं के फोन हैक करने के लग रहे हैं आरोप, आखिर पेगासस स्पाईवेयर क्या बला है, यहां जानें

Updated: Jul 19, 2021, 06:58 PM IST

कैबिनेट मंत्रियों और RSS नेताओं के फोन टैपिंग की खबरों के बीच जानें क्या है पेगासस स्पाईवेयर, कैसे होता है कंट्रोल
Photo Courtsey : IndiaToday

नई दिल्ली। देशभर में पेगासस स्पाइवेयर को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार ने इस स्पाईवेयर की मदद से बड़े-बड़े नेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के जजों के फोन हैक करवा लिया है। यह भी चर्चा है की जल्द ही किसी प्रमुख मीडिया संस्थान द्वारा इसे लेकर विस्तृत खुलासा किया जाएगा। ऐसे में लोगों के मन में अब सवाल यह है कि आखिर ये पेगासस नामक बला है क्या और जासूसी में िसका इस्तेमाल कैसे होता है। 

दरअसल, पेगासस एक स्पाइवेयर यानी खूफिया सॉफ्टवेयर है। इसे इज़रायल की साइबर सिक्योरिटी कंपनी NSO ने विकसित किया है। यह कितना खतरनाक सॉफ्टवेयर है इस बात का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि यह आपके मोबाइल और कंप्यूटर से गोपनीय और निजी जानकारियां चोरी कर किसी तीसरे आदमी को आसानी से भेजने में सक्षम है। किसी भी व्यक्ति पर खूफिया निगरानी रखने के लिए यह सबसे बेहतर सॉफ्टवेयर माना जाता है।

एक मिस्ड कॉल से डिवाइस में सेंधमारी करने में सक्षम

पहले माना जाता था कि यह सॉफ्टवेयर यूजर्स के फोन में किसी लिंक के माध्यम से पहुंचता है और उस पर क्लिक करते ही संबंधित फोन नंबर के व्यक्ति का सारा डेटा साफ्टेवेयर कंपनी तक पहुंच जाता है। जैसे कि किसी व्यक्ति को मेल, वाट्सएप व अन्य माध्यम से इसका लिंक भेजा जाए और इसपर क्लिक करने मात्र से उसके फोन या कंप्यूटर में मौजूद सभी जानकारी यह सॉफ्टवेयर इकट्ठा कर कमांड को भेज दे...यही नहीं, यह सॉफ्देटेवेयर  डिवाइस में हमेशा के लिए रहने भी लगता है। लेकिन अब एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि नये अपडेट के साथ यह स्पाईवेयर अब और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है।

इस स्पाईवेयर का अपडेटेड वर्जन इतना खतरनाक है कि एक मिस्ड कॉल कर के ही इसे संबंधित व्यक्ति के डिवाइस में भेजा जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि आपका डिवाइस कितना भी प्रोटेक्टेड क्यों न हो यह उसमें रहने लगता है और यूजर्स को पता भी नहीं चलता। इसके बाद यह आपका वॉट्सऐप चैट, फोन कॉल, एसएमएस, कैमरा, गैलरी, सभी चीजों को अपने हिसाब से नियंत्रित कर लेता है। इसके बाद स्पाईवेयर ऑपरेटर को पल-पल की जानकारियां मिलती रहती है, कि आप कहां हैं, क्या कर रहे हैं, किससे आपने क्या बातें की आदि।

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इस स्पाईवेयर के जरिए आपके बैंक खाते पर भी नजर रखी जा सकती है। यह मोबाइल कैमरे और माइक्रोफोन से आसपास की सारी चीज़ों के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड कर ऑपरेटर को फॉरवर्ड करने और डिवाइस से उसे डिलीट करने में भी सक्षम है। स्पष्ट शब्दों में कहें तो इसे यदि आपके डिवाइस में भेज दिया जाए तो स्पाइवेयर ऑपरेटर से आपकी एक भी बात छिपी नहीं रहेगी। खास बात यह है कि ये IOS संचालित और एंड्रॉइड दोनों तरह के डिवाइस को हैक कर सकता है।

कौन हो सकता है इस स्पाईवेयर का ऑपरेटर?

इस स्पाइवेयर की निर्माता कंपनी NSO ग्रुप का दावा है कि वे इसका इस्तेमाल किसी भी गलत काम के लिए नहीं करते। कंपनी के मुताबिक वो अपना सॉफ्टवेयर सिर्फ किसी देश की सरकार को बेचते हैं, निजी संस्थान को नहीं। पेगासस उपकरण का उपयोग बड़े पैमाने पर लोगों की निगरानी के लिए नहीं किया जाता है बल्कि यह टारगेट बेस्ड अटैक करता है। ऐसे में जबतक खुद सरकार नहीं चाहती तो यूजर्स के डिवाइस में पेगासस नहीं डाला जा सकता। चूंकि यह बेहद महंगा भी है इसलिए बड़े शक्तिशाली संगठन के अलावा आम नागरिक या संस्था इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

Apple और Google जैसी कंपनियां यह भी दावा करती हैं कि यदि आपका फोन लेटेस्ट IOS 14 या Android 11 आधारित है, साथ ही आप सभी प्रमुख ऐप्स का अपडेटेड वर्जन रखते हैं तो आपको चिंता की जरूरत नहीं है। लेकिन टेक एक्सपर्ट्स इस बात से सहमति नहीं रखते। एक्सपर्ट्स का मानना है कि NSO जैसी कंपनियां आज भी वजूद में हैं। ऐसे में यह मानना गलत है कि आपका फोन हैक-प्रूफ है। ऐसा कोई मानव निर्मित डिवाइस नहीं है, जिसे हैक नहीं किया जा सकता। सावधानियां बरतनी चाहिए, वह अपनी जगह है, लेकिन इन संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता कि समय के साथ पेगासस को भी अपग्रेड कर दिया गया हो।