दफ्तर दरबारी: बीजेपी के नेता हैं, अफसरों को डांट सुनना पड़ेगी 

MP IAS: मंत्री द्वारा आईएएस अफसर को बंगले पर बुलाकर अपमानित करने, बीजेपी विधायक द्वारा आईपीएस अफसर को धमकाने, मंत्री के भाई द्वारा महिला अफसर के साथ दुर्व्यवहार करने की घटनाएं संक्रमण की तरह फैल रही हैं।

Updated: Jun 20, 2026, 04:59 PM IST

लगता है जनप्रतिनिधियों के लिए तय प्रोटोकाल का पालन करने के केंद्र सरकार के सर्कुलर को बीजेपी नेताओं ने कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया है। जनता की समस्या हल करवाने का राजनीतिक दायित्व उठाते-उठाते बीजेपी नेता अफसरों को डांटने-फटकारने का काम करने लगे हैं। खास बात यह है कि यह सब बंद कमरे में या बैठकों में नहीं हो रहा बल्कि सार्वजनिक रूप से हो रहा है और अफसरों को अपमानित करने के वीडियो वायरल भी किए जा रहे हैं। 

मंत्री द्वारा आईएएस अफसर को बंगले पर बुलाकर अपमानित करने, बीजेपी विधायक द्वारा आईपीएस अफसर को धमकाने, मंत्री के भाई द्वारा महिला अफसर के साथ दुर्व्यवहार करने की घटनाएं संक्रमण की तरह फैल रही हैं। अपने इन नेताओं के काम का अनुसरण करते हुए अब बीजेपी के विभिन्न मोर्चा-मंडल के पदाधिकारी भी प्रशासन में हस्तक्षेप करने लगे हैं। वे न केवल हस्तक्षेप् कर रहे हें बल्कि अफसरों को अपमानित करने से चूक भी नहीं रहे हैं। बीते दिनों अलग अलग जगह के वीडियो वायरल हुए जिसमें बीजेपी नेता अफसरों को फटकार रहे हैं।

शिवपुरी में एबीवीपी नेता देशराज नरोलिया ज्ञापन देने गए और कलेक्टर नहीं मिले तो नाराज हो गए। छात्र नेता देशराज नरोलिया ने ज्ञापन लेने आए तहसीलदार सिद्धार्थ भूषण शर्मा खरी-खोटी सुना दी। उन्होंने कलेक्टर अर्पित वर्मा का खड़े-खड़े ट्रांसफर करवाने की धमकी भी दी। विजयपुर में बीजेपी मंडल अध्यक्ष ने जनपद सीइओ को सार्वजनिक रूप से डाँटा। वीडियो वायरल हुआ कि मुरैना जिले के सबलगढ़ में भाजपा मंडल अध्यक्ष शुभम मुदगल ने कार्यकर्ताओं की बैठक विजयपुर जनपद के सीईओ दीपक धाकड़ पर गुस्सा निकाला। वायरल वीडियों में वे जनपद सीईओ दीपक धाकड़ को कह रहे हैं कि एसडीएम और एडीएम एक बार में मेरा फोन उठा लेते हैं, तुम क्यों नहीं उठाते हो? 

तीसरा मामला मुरैना के संबलगढ़ का है। इस वायरल वीडियों में बीजेपी मंडल अध्यक्ष बसंत बंसल मंच पर बुला-बुला कर अधिकारियों को डांटते हुए दिखाई दे रहे हैं। बात जन कल्याण शिविर की है। तीन दिनों के शिविर में अधिकारी के आने पर मंडल अध्यक्ष नाराज हो गए और उपस्थित अधिकारियों को फटकारने लगे। ये शिविर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के काम एक साथ, एक ही जगह पर हो जाने की सुविधा देने के लिए लगाए गए थे। बीजेपी मंडल अध्यक्ष बसंत बंसल ने जन कल्याण शिविर में सबलगढ़ में पदस्थ अधिकारी व कर्मचारियों को मंच पर बुला कर अपमानित किया।

इस बात से नाराज अधिकारियों व कर्मचारियों ने विधायक सरला रावत एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को मुरैना कलेक्टर के नाम पंचनामा बनाकर दिया। अधिकारी कर्मचारियों का कहना है कि नाराजगी दूसरे तरीके से भी व्यक्त की जा सकती है लेकिन अभद्र शब्दों का प्रयोग ठीक नहीं है। संबलगढ़ में कर्मचारियों ने अपने स्तर पर विरोध जताया मगर बाकि जगह कर्मचारी नेताओं की फटकार सुन कर कड़वा घूंट पी कर रह गए, आखिर वे नेता बीजेपी के जो हैं। 

छोटे से बड़ा टकराया, बड़े ने रूतबा गंवाया  

आमतौर पर दो अफसरों में टकराव होने पर वही जीतता है जो बड़ा और ताकतवर होता है। मगर इस बार छोटे और बड़े अफसरों के टकराव में बड़े अफसर की विदाई हो गई। मामला रीवा का है। इस सप्ताह रीवा कमिश्नर बाबू सिंह जामोदी का तबादला हो गया। उनके तबादले का कारण राजनीतिक नहीं है क्योंकि बीजेपी नेताओं के साथ उनका तालमेल नहीं बिगड़ा था। कमिश्नर बाबू सिंह जामोदी के ट्रांसफर का कारण रीवा के भ्रष्टाचार के मामलों पर कलेक्टर द्वारा की जा रही कार्रवाई को कमिश्नर स्तर पर रोकना बताया जा रहा है। लूप लाइन से मैदानी पोस्टिंग पाने वाले आईएएस नरेंद्र सूर्यवंशी ने रीवा कलेक्टर का पद संभालते ही कई स्तरों पर सख्ती की है। प्रशासनिक सख्ती के कारण कर्मचारी भी कलेक्टर के खिलाफ नाराजगी जता चुके हैं। 

रीवा में भ्रष्टाचार पर कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा भी आरोप लगा चुके हैं कि उनके पास भी भ्रष्टाचार की फाइल हैं। इन पर राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई नहीं हो रही है। आरोप लगातार बढ़ रहे थे कि जिन फाइलों में भ्रष्टाचार के सबूत तैयार किए थे कमिश्नर कार्यालय ने उन फाइलों को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया। नतीजा भू-माफिया बेखौफ हैं और दागी अफसर कुर्सियों पर जमे हैं। अंतत: कमिश्नर की विदाई हो गई। माना जा रहा है कि कमिश्नर का तबादला राजनीतिक संरक्षण पर भी चोट है। यह बात ओर है कि छोटे से लड़ाई में बड़े की कुर्सी चली गई। 

अफसरों के झगड़े में आईएएस को मिल गई कुर्सी

एक आईएएस ने आपसी झगड़े में कुर्सी गंवाई तो छिंदवाड़ा में कलेक्टर रहने के दौरान विवादों से घिरे रहने वाले आईएएस शीलेन्द्र सिंह को मैदानी पोस्टिंग मिल गई है। उन्हें रीवा कमिश्नर बनाया गया है। असल में शीलेंद्र सिंह को यह पद मिलना भी क्षतिपूर्ति के रूप में देखा जा रहा है। यह क्षतिपूर्ति उस विवाद की जो आईएएस के व्हाटस अप ग्रुप से उठा था। यह विवाद तब शुरू हुआ जब एसीएस दीपाली रस्तोगी ने छिंदवाड़ा में शुरू किए गए 'वॉश ऑन व्हील्स' मॉडल की प्रशंसा की थी। ग्रुप में कई अधिकारियों ने इसके लिए तत्कालीन कलेक्टश्र शीलेंद्र सिंह को बधाई दी, लेकिन एसीएस दीपाली रस्तोगी ने अपनी प्रतिक्रिया में इस उपलब्धि को पूरी छिंदवाड़ा टीम का सामूहिक प्रयास बताया। उन्होंने जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ अग्रिम कुमार की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि आईटी आधारित पहल का नेतृत्व उन्होंने किया था और बाद में राज्य स्तर पर भी इस मॉडल को आगे बढ़ाया गया।

एसीएस दीपाली रस्तोगी की टिप्पणी के बाद प्रशासनिक गलियारे में यह बहस तेज हो गई शीलेंद्र सिंह के योगदान का कोई उल्लेख नहीं करना प्रमोटी आईएएस को श्रेय न देने जैसा है। इस विवाद को रोकने के लिए मुख्य सचिव अनुराग जैन ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि शीलेंद्र सिंह के नेतृत्व में लागू की गई एक उत्कृष्ट पहल थी, जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रशंसा की थी। मुख्य सचिव की इस टिप्पणी को शीलेंद्र सिंह के योगदान पर मुहर माना गया। पहले नवाचार के लिए पुरस्कार, फिर सीएस से मिली तारीफ के बाद अब उन्हें मैदानी पोस्टिंग का उपहार मिला है। 

महिला एडीएम से आमने-सामने का वक़्त

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली एडीएम लक्ष्मी गामड़ अपनी पोस्ट को लेकर हमेशा चर्चा में रहती हैं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर हुई टिप्पणी को पोस्ट करते हुए लक्ष्मी गामड़ ने टिप्पणीकर्ता के लिए लिखा है कि ये हमारे रेवेन्यू इंस्पेक्टर हैं जो बेतुके कमेंट कर रहे हैं। मैं हर बार मजाक में टाल देती हूं पर लगता हैं अब आमने-सामने मुलाकात का वक्त आ गया है। 

यह पहला मौका नहीं है जब एडीएम लक्ष्मी गामड़ इस अंदाज में पेश आई हैं। कुछ दिन पहले उनकी एक पोस्ट वायरल हुई थी जिसमें उन्होंने एक वैकेंसी ओपन बताते हुए संपर्क करने की बात कही है कि उन्हें एक ऐसा असिस्टेंट चाहिए जो उनके एक इशारे पर सामने वाले को दो चमाट (थप्पड़) मार सके। रील और विवाद से उनका पुराना नाता है। नीमच में पदस्थापना के दौरान एक वकील ने राष्‍ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि एडीएम सरकारी कार्यालय में बैठकर रील बनाती हैं और बाहर एडवोकेट व जनता सुनवाई के लिए परेशान होते हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।