जी भाईसाहब जी: राहुल गांधी की इंदौर यात्रा के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया हुए वायरल

MP Politics: एक जमाना था जब राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया साथ वायरल होते थे। अब भी वे एक साथ वायरल हुए हैं लेकिन अंतर इतना है किअब पार्टी ही नहीं बदली वायरल होने का कारण और असर भी बदल गया है। 

Updated: Sep 22, 2026, 12:52 PM IST

राजनीति में वायरल होना चर्चा में आ जाने का एक माध्यम बनता है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की छात्रों की गूंज कार्यक्रम के लिए हुई इंदौर यात्रा इस सप्ताह सबसे ज्यादा वायरल हुए इवेंट में से एक रही। इस बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी वायरल हुए। फर्क इतना है कि कुछ बरस पहले तक राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में होने के कारण एक साथ एक मुद्दे को लेकर वायरल होते थे अब पार्टी ही नहीं बदली वायरल होने का कारण और महत्व भी बदल गया है। 

छात्रों की गूंज ने राहुल गांधी के आयोजन को चर्चा में ला दिया है। यह बड़े पॉलिटिकल इवेंट में तब्दील हुआ तो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने कामकाज को लेकर जनता के विरोध के कारण वायरल हुए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 18 सितंबर अपने संसदीय क्षेत्र गुना पहुंचे थे। बरखेड़ा गिर्द में मुख्यमंत्री जनविश्वास शिविर के बाद वे लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। कुछ युवकों ने उन्हें रोककर सड़क की समस्या बताई। एक युवक ने कह दिया कि अगर रोड नहीं बनेगी तो हम में से कोई भी वोट नहीं डलेगा। यह सुन कर केंद्रीय मंत्री सिंधिया गुस्सा हो गए। उन्होंने कहा, "ये भाषा मेरे साथ कभी उपयोग नहीं करना। आप आकर निवेदन करो फिर मेरी जिम्मेदारी है काम करना।"

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोगों ने आलोचना करते हुए कहा कि राजशाही तो चली गई है लेकिन व्यवहार अब भी वैसा ही है। इतना ही नहीं, ग्वालियर में सभा के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब सिंधिया के भाषण के दौरान कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाए। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों को पीट दिया। विवाद और धक्का-मुक्की के बीच पुलिस ने हस्तक्षेप कर हंगामा कर रहे लोगों को हटाया। यह पहला मौका है जब गढ् में महाराज यानी सिंधिया से सवाल पूछे जा रहे हैं। उन्हें कहा जा रहा है, काम नहीं हुआ तो वोट मांगने नहीं आना। बीजेपी की सभा में काले झंडे दिखाए जा रहे हैं। 

राहुल गांधी न ऊंचाई दी, अब माहौल बनाए रखने की चुनौती 

राहुल गांधी की इंदौर यात्रा ने कई तरह के मानक और धारणाओं को तोड़ा है। एक आकलन यह है इस आयोजन ने बीजेपी की डबल इंजन सरकारों के खिलाफ पनप रहे आक्रोश का नई ऊचांई दे दी है। विश्लेषण बता रहे हैं कि विपक्ष के रूप में कांग्रेस मुद्दों का उठा तो रही थी लेकिन उनकी एक मजबूत आवाज नहीं बन पा रही थी। अब जबकि शिक्षा और इस बहाने ओबीसी आरक्षण, महिलाओं के विरूद्ध अपराध, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को राहुल गांधी के साथ मंच पर उपस्थित प्रदेश के युवाओं ने खुद उजागर किया है तो जन आक्रोश को जैसे एक ठोस आवाज मिल गई है। 

अब प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी और चुनौती है कि वह छात्रों की गूंज कार्यक्रम द्वारा तैयार किए गए माहौल को बनाए रखे। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश कांग्रेस ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। पार्टी अब शिक्षा, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपर लीक, भ्रष्टाचार, जैसे मुद्दों पर जन समर्थन जुटा कर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। इसके लिए एक टास्क फोर्स बना कर छात्रों और युवाओं से कनेक्ट बना कर रखा जाएगा। योजना है कि विधानसभा चुनाव के पहले हर महीने अलग-अलग जगहों पर छात्र और युवा समस्याओं को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि इंदौर में बना माहौल केवल वक्ती आक्रोश साबित न हो। 

कैलाश विजयवर्गीय का खेद जताना 

प्रदेश में वायरल हुई तमाम राजनीतिक घटनाओं में एक कैलाश विजयवर्गीय का बयान भी शामिल है। कैलाश विजयवर्गीय उन नेताओं में से हैं जो अपने कहे के कारण हमेशा विवाद से घिर जाते हैं। वे बीते कुछ समय से बीजेपी की अंदरूनी राजनीति में हाशिए पर माने जा रहे हैं लेकिन अपने बोल और कार्य के कारण कैलाश विजयवर्गीय हमेशा चर्चा में रहते हैं। इसी क्रम में इंदौर की एक सभा में बीजेपी नेत्री पार्षद संध्या यादव को लेकर सार्वजनिक रूप से कैलाश विजयवर्गीय ने जो कहा वह वायरल हुआ और उस पर प्रतिक्रियाएं भी आईं।

कैलाश विजयवर्गीय ने जो कहा वह इंदौर की आम बोलचाल की भाषा में सहज स्वीकार्य भले ही हो गया हो लेकिन वास्तव में वह बॉडी शेमिंग है यानी किसी को उसकी देह के कारण अपमानित करना। इंदौर की सभा में जब कैलाश विजयवर्गीय ने पार्षद संख्या यादव की देह को लेकर टिप्पणी की तो सभी हँस दिए। खुद पार्षद संध्या यादव भी हँस दी लेकिन उनका कहा वायरल हो गया। लोगों ने एक महिला पार्षद की बॉडी शेमिंग को लेकर कैलाश विजयवर्गीय की तीखी आलोचना की। इन आपत्तियों के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को वीडियो जारी कर कहा कि पार्षद संध्या यादव उनकी बेटी जैसी है। कांग्रेस ने उनके शब्दों का गलत तरीके से उठाया है और मीडिया ने भी उसे जगह दी है। इस कारण वे और बेटी जैसी संध्या यादव भी दु:खी हैं। इस पर मैं खेद व्यक्त करता हूं। 

इसके पहले भी पत्रकार अनुरागी द्वारी के एक सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय ने ऐसा कुछ कह दिया था जिसके लिए बाद में माफी मांगनी पड़ी। कैलाश विजयवर्गीय खरा और बेबाक बोलते हैं लेकिन कभी-कभी उनका बोला ही उनके लिए गले पड़ी मुसीबत बन जाता है। ऐसा ही इसबार भी हुआ। 

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पहली यात्रा में रूठे महापौर 

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पहली बार मध्य प्रदेश आए तो उनके भाषण और कार्यक्रमों से ज्यादा उज्जैन में हुआ विवाद वायरल हो गया। हुआ यूं कि उनके आगमन पर हुए रोड शो में राष्ट्रीय अध्यक्ष की गाड़ी से उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल को उतार दिया गया। बीजेपी की उज्जैन की राजनीति में यह महापौर मुकेश टटवाल का अपमान माना गया।

महापौर मुकेश टटवाल ने कहा है कि बीजेपी जिला प्रभारी बजरंग पुरोहित और कार्यक्रम प्रभारी जयपाल सिंह चावड़ा ने उन्हें रथ में राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ बैठने के लिए कहा था। इसके बाद वे विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के साथ रथ पर सवार हुए। कुछ देर बाद उन्हें रथ से नीचे उतरने के लिए कह दिया गया। इस घटना के बाद शुक्रवार को संत बालीनाथ मंदिर बागपुर में बेरवा समाज के लोगों की बैठक हुई। इसमें महापौर के साथ हुए घटना को बेरवा समाज ने अपना अपमान कहा और तय किया कि फ्रीगंज स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पास प्रार्थना की जाएगी।

महापौर मुकेश टटवाल ने भी कहा कि वे 20 सितंबर को सुबह 11 बजे बाबा साहेब की प्रतिमा के पास बैठकर अपमान सहन करने की शक्ति देने और जनता की ओर से मिली जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाने की प्रार्थना करेंगे। इस अपमान और नाराज महापौर के प्रार्थना करने की खबर सामने आते ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सक्रिय हुए। उनके हस्तक्षेप के बाद आखिरकार महापौर मुकेश टटवाल को मना लिया गया। अंत में बात बन गई लेकिन तब तक मामला वायरल हो चुका था।