MP में सफाईकर्मियों की हड़ताल से बिगड़ी व्यवस्था, भोपाल के पॉश इलाकों में कचरे के ढेर, टैंकर से पानी की सप्लाई भी ठप

मध्यप्रदेश में 1 लाख से अधिक सफाईकर्मियों और निगम कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से भोपाल समेत कई शहरों में सेवाएं ठप हो गई हैं।

Updated: Nov 06, 2026, 01:04 PM IST

मध्यप्रदेश में वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर शुरू हुई सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर अब शहरों की बुनियादी सुविधाओं पर दिखने लगा है। भोपाल में लगातार दूसरे दिन घरों से कचरा नहीं उठाया गया। सड़कों और बाजारों में गंदगी जमा होने के साथ ही पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है। सफाईकर्मियों के समर्थन में नगर निगम के अन्य विभागों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। शुक्रवार को कमिश्नर के साथ कर्मचारियों की बैठक प्रस्तावित है जिसमें उनकी मांगों पर चर्चा की जाएगी।

सफाईकर्मियों की प्रमुख मांगों में मासिक वेतन 10,500 रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करना, अनुकंपा नियुक्ति देना, कर्मचारियों को नियमित करना और ठेका प्रथा समाप्त करना शामिल है। इन मांगों को लेकर प्रदेशभर में एक लाख से अधिक कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। भोपाल में गुरुवार से शुरू हुई हड़ताल के कारण नगर निगम के अधिकांश कामकाज पर असर पड़ा है।

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अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, भोपाल में करीब 7 हजार सफाईकर्मी हड़ताल कर रहे हैं। इनके समर्थन में लगभग 6 हजार अन्य कर्मचारी भी काम बंद कर चुके हैं। इनमें कंप्यूटर ऑपरेटर, बाबू, जलप्रदाय, फायर, बिल्डिंग परमिशन, अतिक्रमण, विद्युत, यांत्रिकी, उद्यान और योजना प्रकोष्ठ के कर्मचारी शामिल हैं। हड़ताल के कारण नगर निगम मुख्यालय अटल भवन सहित शहर के सभी 85 वार्डों और 21 जोन में कामकाज प्रभावित हुआ है। 

गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने निगम मुख्यालय की बिजली आपूर्ति बंद कर दी थी और भवन पर ताला लगा दिया था। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से स्थिति और गंभीर हो गई है। झांझोट ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी अपनी मांगों पर समझौता करने के मूड में नहीं हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात होने के बाद ही हड़ताल खत्म करने को लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा।

राजधानी में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था भी ठप पड़ गई है। घरों से कचरा इकट्ठा करने के लिए नगर निगम की 400 से अधिक गाड़ियां संचालित होती हैं लेकिन हड़ताल के चलते सभी वाहन गार्बेज स्टेशनों पर खड़े हैं। सामान्य दिनों में प्रत्येक वाहन दो से तीन चक्कर लगाकर कचरा इकट्ठा करता है। 

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शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों पर जमा कचरे को कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी स्थित कचरा निष्पादन केंद्र तक पहुंचाया जाता है। भोपाल में प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है। वाहनों का संचालन बंद होने से कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कई इलाकों में डस्टबिन भर चुके हैं और कचरा सड़कों तक फैलने लगा है।

सफाईकर्मियों के आंदोलन में जलप्रदाय विभाग के कर्मचारियों के शामिल होने से पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। शुक्रवार को शहर के कई इलाकों में नल नहीं खोले गए। इसके अलावा टैंकरों से पानी पहुंचाने का काम भी बंद कर दिया गया। इससे खासकर गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों को पानी की परेशानी का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों ने पानी की सप्लाई बंद रखने की चेतावनी भी दी है। भोपाल में 2.30 लाख से अधिक घरेलू नल कनेक्शन हैं। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर राजधानी में बड़े स्तर पर पेयजल संकट पैदा हो सकता है।

भोपाल के अलावा प्रदेश के दूसरे शहरों में भी आंदोलन का असर दिखाई दे रहा है। शिवपुरी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। यहां भी सड़कों और बाजारों में कचरा जमा होने लगा है। विदिशा सहित कई अन्य शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। इस बीच कुछ जगहों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने खुद सफाई की जिम्मेदारी संभाली। विदिशा जिले के सिरोंज में विधायक उमाकांत शर्मा बुधवार रात सड़क पर उतरे और करीब दो घंटे तक झाड़ू लगाकर सफाई की। गुरुवार को भी शहर में सफाई व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी।

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वहीं, राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में कपड़े सिलने की दुकान चलाने वाले दिनेश कुमार नामदेव उर्फ पप्पू ने गुरुवार सुबह अपनी दुकान बंद रखकर सफाई अभियान चलाया। झाड़ू और हाथ ठेला लेकर वे सुभाष चौक से सर्राफा बाजार तक पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे में सड़क पर फैला कचरा इकट्ठा कर शहर से बाहर पहुंचाया। दिनेश का कहना था कि दिवाली के दौरान बाजार में दूसरे शहरों और गांवों से भी लोग खरीदारी करने आते हैं। ऐसे में बाजार में गंदगी रहने से शहर की छवि खराब होगी। उनकी इस पहल को देखकर कुछ अन्य लोग भी सफाई में सहयोग करने के लिए आगे आए थे।