KBC: पद्मश्री फूलबासन ने कौन बनेगा करोड़पति में जीते 50 लाख रुपये

Phoolbasan Bai Yadav: स्वसहायता समूह के जरिए 2 लाख से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं फूलबासन यादव, 10 महिलाओं के साथ दो मुट्ठी चावल और दो रुपये हफ्ते से शुरू किया था सफर

Updated: Oct 25, 2020, 03:11 PM IST

KBC: पद्मश्री फूलबासन ने कौन बनेगा करोड़पति में जीते 50 लाख रुपये
Photo Courtesy: shethepeople.tv

रायपुर। जानेमाने क्विज़ शो कौन बनेगा करोड़पति के 12वें सीजन में छत्तीसगढ़ की फूलबसन यादव ने 50 लाख रुपए जीत लिए हैं। वे शुक्रवार को प्रसारित कर्मवीर स्पेशल सेगमेंट में शामिल हुईं। फूलबासन को गेस्ट के तौर पर बुलाया गया था। कर्मवीर सेगमेंट में फूलबसन के साथ एक्ट्रेस रेणुका शाहाणे भी हॉटसीट पर उनका हौसला बढ़ाने पहुंची थीं। 50 साल की फूलबासन यादव आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लंबे समय से काम कर रही हैं। वे अब तक छत्तीसगढ़ की लाखों गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। केबीसी के दौरान महानायक अमिताभ बच्चन ने फूल बसन की उपलब्धियों को सराहा।

केबीसी में सुनाई जिंदगी की दास्तां

कौन बनेगा करोड़पति के दौरान अमिताभ बच्चन से बातें करते हुए फूलबासन ने अपनी जिंदगी के संघर्ष की कहानियां सुनाईं। उन्होंने कहा कि वे बचपन में वो पढऩा चाहती थीं, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से उनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में अक्षम थे। उनकी शादी 10 साल की उम्र में एक चरवाहे से कर दी गई। 14 साल की उम्र में गौना हुआ और वे ससुराल आ गई।

फूलबासन  को ससुराल में भी गरीबी झेलनी पड़ी, वे दूसरों के घर में काम करने जाती थीं, कई बार बच्चों का पेट भरने के लिए उन्हें खाना मांगकर गुजारा करना पड़ता था। इन परेशानियों को चुनौती मानते हुए फूलबसन ने ठान लिया कि गरीबी, भुखमरी और बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाएंगी।

दो मुट्ठी चावल और दो रुपये हफ्ते जोड़कर बनाया स्व-सहायता समूह

आर्थिक रूप से मजबूत होने के लिए फूलबासन ने दस महिलाओं के साथ मिलकर एक स्वसहायता समूह बनाया। जिसके तहत दो मुट्ठी चावल और हर हफ़्ते दो रुपए जमा किए जाते थे। लेकिन उनके पति को यह सब पसंद नहीं आया। लेकिन पति के विरोध के बावजूद वो अपने निश्चय पर अडिग रहीं और कभी हार नहीं मानी।

दो लाख से ज्यादा महिलाओं को जोड़ने का किया काम

फूलबासन ने बताया कि अपने समूह की महिलाओं की मदद से बम्लेश्वरी ब्रांड के नाम से आम और नींबू के अचार तैयार किए। प्रदेश के तीन सौ से ज्यादा स्कूलों में मिड डे मील के साथ उनका अचार परोसा जाने लगा। इसके बाद फूलबासन ने स्वसहायता समूह की महिलाओं के साथ मिलकर अपने काम को और विस्तार दिया। अब वे अगरबत्ती, वॉशिंग पावडर, मोमबत्ती, बड़ियां-पापड़ बनाने का काम करने लगीं। धीरे-धीरे दस लोगों से शुरू हुए स्वसहायता समूह में दो लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ गईं। छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भर होने की राह पर चल पड़ीं।

पर्यावरण संरक्षण, समाज की बुराइयां दूर करने में भी आगे

फूलबासन का महिला स्व-सहायता समूह गांवों में साफ-सफाई, वृक्षारोपण, जलसंरक्षण का काम भी करता है। वहीं सिलाई-कढ़ाई सेंटर खोला गया है, ताकि महिलाएं और बच्चियां ट्रेनिंग लेकर आत्मनिर्भर बन सकें। फूलबसन समाज में शराब बंदी, बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ भी आवाज उठाती हैं। गरीब और अनाथ बच्चों की पढ़ाई के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में जुटी हुई हैं। उनका स्वसहायता समूह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए-नए कीर्तिमान रच रहा है।

केबीसी में जीती 50 लाख की रकम

फूलबासन यादव ने अपने स्वसहायता समूह के लिए केबीसी में 50 लाख रुपये जीते हैं। शो में उनकी मदद के लिए एक्ट्रेस रेणुका शहाणे भी मौजूद थीं। आखिरी सवाल में उन्हें एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ी थी। 50 लाख रुपये के सवाल में उनसे पूछा गया था कि ‘ इनमें से कौन एक पर्यावरणविद थीं जिन्हें अपने राज्य हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन के खिलाफ लड़ाई लड़ने और जोरदार आवाज उठाने के लिए जाना जाता है? इस सवाल के उत्तर के लिए फूलबसन ने आस्क द एक्सपर्ट लाइफ लाइन ली और सही उत्तर बताकर 50 लाख रुपये जीत लिए।