Pola Festival: पारंपरिक पोला तिहार पर नहीं हुई बैलों की दौड़

CM Bhupesh Baghel: मुख्यमंत्री के आवास पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मनाया गया खेती-किसानी से जुड़ा पर्व, कोरोना काल में फीका रहा कार्यक्रम

Updated: Aug 19, 2020 03:37 PM IST

Pola Festival:  पारंपरिक पोला तिहार पर नहीं हुई बैलों की दौड़

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित आवास में पोला-तीजा का तिहार का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को पारंपरिक पोला तिहार पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दी है। इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नागरिकों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की है।

शुभकामना देते हुए उन्होंने ट्वीट किया है कि ‘पोला तिहार छत्तीसगढ़ की परम्परा, संस्कृति और लोक जीवन की गहराइयों से जुड़ा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना के चलते प्रदेशवासियों और किसानों पोला तिहार के मनाने के दौरान मास्क लगाने तथा फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की है।

मुख्यमंत्री आवास में पोला तिहार की धूम

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित आवास में पोला-तीजा का तिहार का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोरा-तीजा तिहार के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री निवास में विशेष इंतजाम किया गया। मुख्यमंत्री निवास परिसर में छत्तीसगढ़ की परम्परा और रीति-रिवाज के अनुसार साज-सज्जा की गई। इस मौके पर नांदिया-बैला की पूजा हुई। पोला उत्सव के दौरान सीएम भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ी रंग में रंगे दिखे, इस दौरान मुख्यमंत्री लोक धुन में झूमते नजर आए।  

 

 

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में  शिवलिंग की पूजा की गई। वहीं एक सेल्फी जोन बनाया गया है। जहां नांदिया बैला के साथ लोग सेल्फी लेते नजर आए। रइचुली झूला और चकरी झूला भी कार्यक्रम स्थल पर लगाया गया है। महिलाएं सज धज कर मुख्यमंत्री निवास पहुंची। धूमधाम से तिहार मनाने पर महिलाओं ने भूपेश बघेल को धन्यवाद दिया।  

 भाद्रपद महीने की अमावस्या को मनाया जाता है पोला तिहार

भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पोला या पोरा पर्व, खरीफ फसल की निंदाई गुड़ाई का काम पूरा हो जाने पर मनाया जाता हैं। खेतों में फसलों के बढ़ने की खुशी में किसान बैलों की पूजा करते हैं और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रगट करते हैं। इस मौके पर जगह-जगह बैलों की पूजा-अर्चना की जाती है। गांव के किसान भाई सुबह से ही बैलों को नहला-धुलाकर सजाते हैं, फिर हर घर में उनकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद घरों में बने पकवान भी बैलों को खिलाए जाते हैं। कई गांवों में इस अवसर पर बैल दौड़ का भी आयोजन किया जाता है।

घरों में बनते हैं पारंपरिक पकवान

लोक पर्व पोला तिहार पर छत्तीसगढ़ के घरों में ठेठरी, खुरमी, चौसेला, खीर, पूड़ी, बरा, मुरकू, भजिया, मूठिया, गुजिया, तसमई जैसे कई छत्तीसगढ़ी पकवान बनाए जाते हैं। इन पकवानों को सबसे पहले बैलों की पूजा कर भोग लगाया जाता है। इसके बाद परिवार के लोगों को प्रसाद वितरण किया जाता है।

एक-एक मिट्टी का खिलौना फोड़ने की भी है परंपरा

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में लड़कियां अपनी सहेलियों के साथ गांव के बाहर मैदान या चौराहों पर जाती हैं,जहां नंदी बैल या साहडा देव की प्रतिमा स्थापित रहती है। वहां जाकर पोरा पटका जाता है। इस परंपरा में सभी अपने-अपने घरों से एक-एक मिट्टी के खिलौने को एक निर्धारित जगह पर पटककर-फोड़ते हैं। जो कि नदी बैल के प्रति आस्था प्रकट करने का एक पारंपरिक तरीका है। वहीं युवक कबड्डी, खोखो जैसे खेल खेलते हैं। प्रदेश की परंपरा और संस्कृति से जुड़े पोला-तिहार पर्व पर भी कोरोना का असर पड़ा है। पर्व को सादगी से मनाया जाएगा। इस बार बैल दौड़ प्रतियोगिता नहीं होगी। बच्चे सिर्फ अपने घरों में ही मिट्टी के बैल दौड़ाएंगे।