साइंस, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेगी तो कृषि में नतीजे बेहतर और तेजी से आएंगे: प्रधानमंत्री

पीएम नरेंद्र मोदी ने गोबर से बिजली बनाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से फसलों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के प्रयासों की तारीफ की

Updated: Sep 28, 2021, 04:26 PM IST

साइंस, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेगी तो कृषि में नतीजे बेहतर और तेजी से आएंगे: प्रधानमंत्री
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रायपुर। भारतीय मोटे अनाज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक जाने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इस बात की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। वे छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के नये परिसर का शुभारंभ के मौके पर बोल रहे थे। इस ऑनलाइन आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व सीएम रमन सिंह समते बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान का डिजिटल उद्घाटन किया।

 प्रधानमंत्री ने फसलों की 35 खास किस्मों के राष्ट्र को समर्पित किया। ये किस्में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित की गई हैं। जिससे जलवायु परिवर्तन और कुपोषण की दोहरी चुनौती से निपटा जा सके। जलवायु अनुकूल प्रौद्योगिकी अपनाने के लेकर जागरुकता फैलाने के मकसद से इन्हें विकसित किया गया है। 

इस मौके पर उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरे इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती है। नित नये कीट, रोगाणु, हमारी फसलों, पशुओं और इंसानों पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रयास तेज करने की जरूरत है। इस बारे में साइंस, सरकार और सोसायटी के मिलकर काम करने से नतीजे बेहतर और तेजी से आएंगे। पीएम ने कहा कि किसानों एवं वैज्ञानिकों के गठजोड़ से नई चुनौतियों से निपटने की ताकत मिलेगी।

 

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से फसलों को बचाने के लिए जारी प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने गोबर से बिजली उत्पादन और छत्तीसगढ़ मिशन मिलेट के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल की सराहना की। प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से फसलों को बचाने के लिए जारी प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने गोबर से बिजली उत्पादन और छत्तीसगढ़ मिशन मिलेट के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल की सराहना की।

अपने संबोधन में उन्होंने कृषि क्षेत्र संबंधी उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़ों और समय पर समाधान हासिल करने के लिए आधुनिक ड्रोन के साथ सेंसर का उपयोग बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी को हर गांव में पहुंचाने की आवश्यकता है, इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कदम उठाए गए हैं।

अब देश के किसानों को सिर्फ फसल आधारित सिस्टम से बाहर आकर वैल्यू एडिशन और खेती के दूसरे आप्शन की ओर भी प्रेरित करने की कोशिश की जा रही है। इसकी सबसे ज्यादा जरूरत छोटे और मझौले किसानों को है, इसलिए पूरा ध्यान छोटे किसानों पर लगाना ही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए सरकार ने उन्हें बैंकों से मदद को और आसान बनाया है। देश के किसानों को मौसम की जानकारी बेहतर तरीके से मिल रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए खास अभियान चलाकर दो करोड़ से ज्यादा कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड बांटे गए हैं। पीएम फसल बीमा योजना से किसानों को लाभ हो और सुरक्षा मिले, इसकी चिंता की गई। उन्होंने कहा कि किसानों को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की क्लेम राशि का भुगतान किया गया है।