छत्तीसगढ़ी गमछे से होगा सरकारी अतिथियों का स्वागत, प्रदेश की कला, संस्कृति के रंगों में रंगे खास गमछे तैयार

सिल्क और खादी के छत्तीसगढ़ी गमछों में सरगुजा की भित्ति चित्रकला, गोदना प्रिंट आएगा नजर, धान की बाली, राजकीय पशु, पक्षियों के चित्रों को दिया गया स्थान, इससे होने वाली कमाई का 95 प्रतिशत हिस्सा मजदूरों में बंटेगा

Updated: Oct 15, 2021, 03:24 PM IST

छत्तीसगढ़ी गमछे से होगा सरकारी अतिथियों का स्वागत, प्रदेश की कला, संस्कृति के रंगों में रंगे खास गमछे तैयार
Photo courtesy: Bhaskar

रायपुर। प्रदेश की कला संस्कृति को एक नया मंच मिलने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने तय किया है कि अब राजकीय अतिथियों का स्वागत छत्तीसगढ़ी गमछे से किया जाएगा। वहीं सरकारी कार्यक्रमों में भी राजकीय गमछे से ही मेहमानों का स्वागत किया जाएगा। इन खास गमछों में छत्तीसगढ़ के सरगुजा की पारंपरिक भित्तिचित्र कला की छाप देखने को मिलेगी। गमछों पर भित्त चित्र बनाने के लिए चटख रंगों का उपयोग किया गया है। इस गमछे से प्रदेश की संस्कृति को नया मंच तो मिलेगा ही, वहीं इसे तैयार करने वाले शिल्पियों, बुनकरों को मेहनताने के अलावा इनसे होने वाली कमाई का 95 प्रतिशत हिस्सा देने की बात कही जा रही है। प्रदेश सरकार गमछा बुनकरों और गोदना शिल्पकारों को इनकी बिक्री से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा देने वाली है।

यह गमछा टसर सिल्क और खादी से तैयार किया जाएगा। जिसे स्थानीय बुनकरों द्वारा ताने में फिलेचर सिल्क यार्न और बाने में डाभा टसर यार्न एवं घींचा यार्न से तैयार किया जाएगा। ये गमछा 24 इंच चौड़ा और 84 इंच लंबा है। सिल्क गमछे की बुनाई 120 रुपए प्रति पीस रखी गई है। इस टसर सिल्क के गमछे की बुनाई सिवनी चांपा के बुनकरों द्वारा की जा रही है। फिर इसमें सरगुजा की महिलाएं गोदना शिल्प उकेर रही हैं।

गोदना के काम में काफी मेहनत और समय लगता है। दो शिल्पी मिलकर एक दिन में केवल एक ही गमछा तैयार कर पाती हैं। प्रति सिल्क गमछे में गोदना के लिए उन्हें 700 रुपए प्रति गमछे की दर से मेहनताना दिया जाता है। वहीं सिल्क गमछे की कीमत GST समेत 1,534 रुपए रखी गई है।

बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव के बुनकर हाथकरघे पर खादी के गमछे तैयार कर रहे हैं। इनकी बुनाई के बाद इनमें स्क्रिन प्रिंट से डिजाइन छापे जा रहे हैं। सिल्क गमछे की ही तरह इनकी भी चौड़ाई 24 इंच और लंबाई 84 इंच रखी जा रही है। खादी के गमछे की कीमत 239 रुपए तय की गई है। मजदूरों को 60 रुपए प्रति नग की दर से बुनाई दी जाएगी। छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पहचान वाले राजकीय गमछे का लोकार्पण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। इस मौके पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे।

इन्हें छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ द्वारा तैयार करवाया जा रहा है। ये प्रदेश की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहरों को प्रदर्शित करेंगे। गमछों पर प्रदेश के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, राजकीय पशु वन भैंसा, मांदर, बस्तर के प्रसिद्ध गौर मुकुट और लोक नृत्य करते लोक कलाकारों के चित्र उकेरे जा रहे हैं। इन्हें गोदना चित्रकारी द्वारा अंकित किया गया है। वहीं इसमें धान का कटोरा के नाम से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ की छवि दिखाने के लिए धान की बाली और हल जोतते किसानों को भी दिखाया गया है।