Shakuntala Devi: नंबरों की जादूगरनी की कहानी

Vidya Balan: फिल्म ‘शकुंतला देवी’ की कहानी एक मेधावी लडकी शकुंतला की है, जो बचपन से मैथ्स की जीनियस है, वो अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती है। चाहे वह उसका बचपन हो, जवानी या फिर बुढ़ापा, जीवन का हर दौर उसे आजादी के साथ जीना है।

Updated: Aug 01, 2020 10:27 PM IST

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हुनर और हाजिर जवाबी से मिली शोहरत
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1. हुनर और हाजिर जवाबी से मिली शोहरत

शकुंतला देवी फिल्म की कहानी 1940 के बैकग्राउंड में बनी है, जो शुरू होती है अनु से जो अपनी मां शकुंतला देवी से कानूनन सम्बन्ध विच्छेद करना चाहती है। बैंगलोर के पास एक गांव है जहां एक कन्नड़ परिवार की लड़की अपने तेज दिमाग से सबको चौंका देती है और ये उसके परिवार के लालन पालन का जरिया बन जाता है। बिना स्कूल गए शकुंतला कठिन गणित के सवाल चुटकियों में हल कर देती है। उसके पिता उसकी कला को अपने लालच में बदल देते हैं। अपनी बहन की मौत शकुंतला को बागी बना देती है। लेकिन उसके मैथ्स का हुनर, जज्बा और हाजिरजवाबी शकुंतला को लंदन तक लेकर जाता और विश्व मंच पर वो बन गयी है एक ह्यूमन कंप्यूटर।