ब्रिटेन में फाइज़र की वैक्सीन को मंजू़री, अगले हफ्ते से होगी उपलब्ध

Pfizer Corona Vaccine Approved:दुनिया में पहली बार कोरोना से बचाव के लिए किसी वैक्सीन को मंज़ूरी दी गई है, सबसे पहले बुजुर्गों को लगाई जाएगी वैक्सीन

Updated: Dec 02, 2020, 08:33 PM IST

ब्रिटेन में फाइज़र की वैक्सीन को मंजू़री, अगले हफ्ते से होगी उपलब्ध
Photo Courtesy: Zee News

लंदन। कोरोना वैक्सीन को लेकर बड़ी और अच्छी खबर है। Pfizer-BioNTech की कोरोना वैक्सीन को ब्रिटेन ने मंज़ूरी दे दी है। दुनिया में पहली बार कोरोना से बचाव के लिए किसी वैक्सीन के इस्तेमाल को मंज़ूरी दी गई है। ब्रिटेन में अगले हफ्ते से ही इस वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। ब्रिटेन की सरकार ने एक बयान में कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ 95 फीसदी तक सुरक्षा प्रदान करने वाली फाइज़र-बायोएनटेक कंपनी की वैक्सीन लोगों के बीच उपलब्ध कराए जाने के लिए तैयार है। फाइज़र की इस वैक्सीन को अब तक अमेरिका और यूरोपीय यूनियन में इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिलना बाकी है।

वैक्सीन अगले हफ्ते से लोगों को मिलने लगेगी। बता दें कि ब्रिटेन ने पहले ही इस वैक्सीन की चार करोड़ खुराक बनाने का आदेश दे दिया था, जो दो करोड़ लोगों के लिए पर्याप्त होंगी। प्रत्येक व्यक्ति को वैक्सीन की 2 खुराक देनी होती है। जानकारी के मुताबिक ये वैक्सीन सबसे पहले बुजुर्गों के लिए ही उपलब्ध कराई जाएगी।

ब्रिटेन में दवाओं के इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी देने वाली संस्था मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (MHPRA) ने कहा कि उसकी जांच में फाइज़र की वैक्सीन सुरक्षा, क्वॉलिटी और असर, तीनों मामलों में उसके सख्त मानदंडों पर पर खरी उतरी है। ब्रिटेन की सरकार ने कुछ दिनों पहले ही संकेत दिए थे कि वो कोरोना की वैक्सीन को मंज़ूरी देने में देर नहीं करेगी। देश भर के डॉक्टरों को इसके लिए पहले से ही तैयार रहने को कहा गया था। ब्रिटेन में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर साठ हज़ार के करीब पहुंच चुकी है। इन हालात में वहां की सरकार के इस वैक्सीन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना पहली प्राथमिकता बनी हुई है।

वैक्सीन का स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन बड़ी चुनौती

फाइजर की वैक्सीन का स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन आसान नहीं है। ऐसा इसलिए क्यों कि इसे शून्य से 70 डिग्री कम तापमान पर रखना होता है। यही वजह है कि इसे ड्राई आइस यानी सॉलिड कार्बन डाई ऑक्साइड में पैक करके विशेष बॉक्स में ले जाया जाएगा। इसे सामान्य फ्रिज़ में महज पांच दिनों तक ही रखा जा सकता है। भारत जैसे विकासशील देश में इस टीके की सप्लाई एक बड़ी चुनौती है।

फाइज़र के बाद मॉडर्ना और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की पार्टनर कंपनी आस्ट्राज़ेनेका भी जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटी हैं। ये सभी कंपनियां कम से कम वक्त में वैक्सीन बनाने का प्रयास कर रही हैं, ऐसे में इन्हें मंज़ूरी देने वाली संस्थाओं का काम बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्हें इस बात का ख़ास ध्यान रखना होगा कि कहीं जल्द से जल्द वैक्सीन बनाने के चक्कर में लोगों की सेहत और सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न होने पाए।