इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 33वीं मौत, इलाज के दौरान 70 वर्षीय बुजुर्ग ने तोड़ा दम

भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। अलगूराम यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह शहर में दूषित पानी की वजह से हुई 33वीं मौत है।

Updated: Feb 06, 2026, 11:34 AM IST

इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में 70 वर्षीय अलगूराम यादव की इलाज के दौरान मौत हो गई। वे लंबे समय से वेंटिलेटर पर थे। इससे पहले उनकी पत्नी की भी इसी बीमारी के चलते मौत हो गई थी। एक ही परिवार में दो मौतों के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है। यह शहर में दूषित पानी से होने वाली 33वीं मौत है।

क्षेत्र के रहवासियों का कहना है कि उल्टी-दस्त के बाद बीमारी तेजी से गंभीर हो रही है। पहले पेट संबंधी दिक्कतें शुरू होती हैं फिर धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंग प्रभावित होने लगते हैं। पिछले दिनों हुई मौतों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा सामने आई है जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

दूसरी तरफ निगम की जांच में दूषित पानी की बड़ी वजह सामने आई है। वार्ड 80 के रहवासी पिछले कुछ दिनों से शिकायत कर रहे थे कि नल खोलने पर शुरुआती 10 से 15 मिनट तक नर्मदा जल के बजाय बदबूदार और गंदा पानी आ रहा है। शिकायत के बाद निगम की टीम जांच करते हुए नर्मदा जल वितरण के वाल्व चैंबर तक पहुंची। जब वहां खुदाई की गई तो अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच में पता चला कि कुछ लोगों ने निजी ड्रेनेज लाइन को सीधे नर्मदा के चैंबर में जोड़ दिया था। जैसे ही पानी के लिए वाल्व खोला जाता वैसे ही ड्रेनेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिलकर घरों तक पहुंच जाता था।

निगम की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ड्रेनेज लाइन को चैंबर से अलग कराया। पार्षद प्रशांत बड़वे ने बताया कि पाराशर नगर रहवासी संघ की शिकायत पर जब जांच हुई तो 12 ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास बने नर्मदा वाल्व चैंबर से बदबूदार पानी निकलता पाया गया। खुदाई में सामने आया कि पास के चार मकानों ने अपनी निजी ड्रेनेज लाइन अवैध रूप से इसी चैंबर में जुड़ी हुई थी।

मामला उजागर होने के बाद विवाद भी खड़ा हो गया। पाराशर नगर रहवासी संघ का आरोप है कि जिन मकानों ने ड्रेनेज लाइन जोड़ी थी वे कॉलोनी के मूल लेआउट में शामिल ही नहीं हैं और अवैध हैं। पार्षद बड़वे के मुताबिक, इन मकानों की वैधता की जांच कराई जाएगी। वहीं, आरोप है कि इन मकानों के मालिक शिकायत करने वाले रहवासियों को धमकाने लगे और विवाद की स्थिति बन गई। फिलहाल ड्रेनेज लाइन हटाने के बाद क्षेत्र में शुद्ध पानी की आपूर्ति शुरू हो गई है लेकिन लोगों में डर अब भी बना हुआ है।

शहर के एक अन्य हिस्से ताप्ती परिसर में भी नागरिक समस्याएं सामने आई हैं। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रंगवासा सिंदौड़ा स्थित ताप्ती परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने फेस 2 के ब्लॉक में बचे हुए निर्माण कार्य और बिजली आपूर्ति को जल्द पूरा करने के निर्देश एजेंसी को दिए। फेस 1 और फेस 3 की आवासीय इकाइयों का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

ताप्ती परिसर में 1500 से अधिक परिवार रहते हैं। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने रहवासियों से चर्चा की जहां लोगों ने सामुदायिक भवन के निर्माण में हो रही देरी, साफ-सफाई और रखरखाव की खराब स्थिति को लेकर नाराजगी जताई। निगमायुक्त ने समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया है।