आयुष कॉलेजों में अवैध एडमिशन के मामले में कांग्रेस का सीएम पर वार, आखिर कितना धन कमाना चाहते हो

मध्य प्रदेश के आयुष कॉलेजों में प्रवेश में हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा, तीन वर्षों में अवैध तरीके से दिलाया गया 549 छात्रों को प्रवेश

Publish: Sep 14, 2021, 10:32 AM IST

आयुष कॉलेजों में अवैध एडमिशन के मामले में कांग्रेस का सीएम पर वार, आखिर कितना धन कमाना चाहते हो
Photo Courtesy: Patrika

भोपाल। मध्य प्रदेश के आयुष कॉलेजों में प्रवेश को लेकर बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। तीन साल की अवधि में प्रदेश के आयुष कॉलेजों में कुल 549 छात्रों को अवैध तरीके से प्रवेश दिया गया। यह फर्जीवाड़ा सीएम शिवराज के पिछले कार्यकाल के दौरान हुआ था। इस फर्जीवाड़े को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर वार किया है। 

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस घोटाले के सिलसिले में सीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में व्यापम महाघोटाला जारी,आयुष विभाग में 549 छात्रों के फ़र्ज़ी एडमिशन;व्यापम महाघोटाले की श्रंखला में अब निजी एवं सरकारी आयुष मेडिकल कॉलेजों में तीन साल में 549 छात्रों के फ़र्ज़ी एडमिशन का मामला सामने आया है।शिवराज जी, आख़िर कितना धन कमाना चाहते हो?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2016 से 2018 की अवधि में सैकड़ों छात्रों को आयुष कॉलेजों में बैक डोर से एंट्री दी गई। 2016 और 2017 में आयुष विभाग ने पाहुट(PAHUT) परिक्षा आयोजित कराई थी। प्रदेश के विभिन्न आयुष कॉलेजों ने एमपी ऑनलाइन काउंसलिंग में हिस्सा लिए बगैर अपात्र छात्रों से मोटी रकम वसूल कर उन्हें एडमिशन दे दिया। जबकि 2018 में नीट प्रवेश परीक्षा अनिवार्य होने के बावजूद नीट की सीटों पर छात्रों को प्रवेश दिया गया। 

अपात्र छात्रों को होम्योपैथी, यूनानी और आयुर्वेद पैथी में प्रवेश के लिए पांच लाख रुपए तक की मोटी रकम वसूली की गई थी। इनमें से ज्यादातर छात्र अपनी डिग्री पूरी कर चुके हैं वहीं कुछ छात्रों की डिग्री इस वर्ष पूरी हो जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फर्जीवाड़े को खुद आयुष विभाग के बड़े अधिकारियों के इशारे पर अंजाम दिया गया। जिस दौरान यह पूरा घोटाला हुआ उस समय डॉ जेके गुप्ता के कार्यकाल में हुआ था। डॉ गुप्ता विभाग के OSD और कॉलेज शाखा के प्रभारी थे। 

आयुष कॉलेजों में प्रवेश को लेकर हुई धांधली की पहली बार शिकायत फरवरी 2020 में की गई थी। जिसके बाद संचालनालय ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। जिसने इसी साल जून महीने में आयुष विभाग के प्रमुख सचिव कर्लिन खंगवार को सौंपी थी। लेकिन समिति ने पहले तो जांच करने में एक साल से भी ज्यादा का वक्त लिया। और अब दोषियों पर कार्रवाई करने में लेटलतीफी हो रही है।