लॉकडाउन में अव्यवस्था की मिसाल बनी राजधानी, भोपाल प्रशासन पर उठ रहे सवाल

रविवार को भोपाल में लॉकडाउन के दौरान लोगों के घरों तक न तो दूध पहुंचा और न ही बाहर से परीक्षा देने आए छात्रों के लिए कोई बेहतर इंतज़ाम किया गया

Updated: Mar 22, 2021, 09:57 AM IST

लॉकडाउन में अव्यवस्था की मिसाल बनी राजधानी, भोपाल प्रशासन पर उठ रहे सवाल
Photo Courtesy: New Indian Express

भोपाल। मध्य प्रदेश के तीन शहरों भोपाल, इंदौर और जबलपुर में कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण शनिवार रात से सोमवार सुबह तक लॉकडाउन लगाया गया। लेकिन लॉकडाउन को सही ढंग से लागू कर पाने में भोपाल प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा। राजधानी में आदेश के बावजूद लोगों के घरों तक दूध नहीं पहुंचा। कई और मामलों में भी बदइंतज़ामी साफ नज़र आई।

दरअसल रविवार सुबह 6 बजे से 10 बजे तक दूध के वितरण की छूट दी गई थी। लेकिन दो अलग-अलग आदेशों के चलते ऐसी गफलत हुई कि लॉकडाउन में लोगों को दूध के लिए तरसना पड़ा। जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, उन्हें दूध के बिना काफी परेशानी हुई। कई लोगों ने पड़ोसियों से दूध मांगकर काम चलाया। शुक्रवार को कहा गया था कि रविवार को मिल्क पार्लर नहीं खोले जा सकेंगे। लेकिन शनिवार को मिल्क पार्लर खोले जाने की अनुमति दे दी गई। इससे गफलत की स्थिति उत्पन्न हुई।

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दुग्ध संघ के सीईओ ने एक हिंदी अख़बार को बताया कि शनिवार को दूध की खपत भी ज़्यादा हुई। आम तौर पर एक दिन में 1 लाख 20 हज़ार लीटर दूध की खपत होती है, लेकिन शनिवार को 2 लाख 60 हज़ार लीटर दूध की खपत हुई। इससे मिल्क पार्लर में दूध की कमी हो गई। ऐसा लोगों के बीच लॉकडाउन के दिन मिल्क पार्लरों के खुलने या न खुलने को लेकर दो आदेशों से पनपे असमंजस के कारण हुआ। रविवार सुबह जब लॉकडाउन शुरू हुआ, तब ऐसे लोगों को समस्या से जूझना पड़ा, जिन्होंने रविवार को मिल्क पार्लर खुलने की उम्मीद में शनिवार को ज्यादा दूध नहीं खरीदा था।

इसके अलावा रविवार सुबह राजधानी में लॉकडाउन का असर लगभग गायब ही रहा। सुबह सुबह लोग सड़क पर घूमते दिखाई दिए। प्रशासन की सख्ती के बाद लोग अपने अपने घरों की ओर लौटे। राजधानी में पीएससी, नेवी और एसएसबी की प्रतियोगी परीक्षाओं का भी हो रहा था। परीक्षार्थियों को खाने से लेकर यात्रा तक की समस्याओं से जूझना पड़ा।

रेलवे स्टेशन पर ऑटो चालकों ने परीक्षार्थियों से मनमाना किराया वसूला। ऑटो में परीक्षार्थियों को ठूस-ठूस कर उनके केंद्र तक चालक ले गए। परीक्षार्थियों को उनके केंद्र तक ले जाने के लिए चालकों ने पांच पांच गुना अधिक किराया वसूला। पांच किलोमीटर की दूरी पर ऑटो चालकों ने परीक्षार्थियों से 600 रुपए तक किराया वसूली की। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग भी पूरी तरह से नदारद रही।

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परीक्षार्थियों को खाने पीने की समस्या से भी जूझना पड़ा। स्टेशन पर स्थित होटल में 50 रुपए की थाली का परीक्षार्थियों से 300 रुपए की वसूली की गई। उधर नगर निगम ने दीन दयाल उपाध्याय रेस्टोरेंट भी बंद कर रखे थे। जबकि लॉकडाउन के दौरान सबसे ज़्यादा ज़रूरत इन्हीं रेस्टोरेंट की थी। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन तीन हज़ार लोगों का पेट इन्हीं रेस्टोरेंट के ज़रिए भरता है। 

लॉकडाउन का असर केवल भोपाल शहर तक ही देखने को नहीं मिला। शहर से आगे गांव के किसानों को भी भोपाल में लगे लॉकडाउन के कारण परेशानी उठानी पड़ी। 80 पेट्रोल पंपों में से केवल 15 पेट्रोल पंप ही खुले हुए थे। लिहाज़ा हाईवे पर पेट्रोल पंप बंद होने के कारण किसानों को डीजल नहीं मिल सका।