भोपाल में कोरोना से मरने वाले 60 फीसदी लोग गैस पीड़ित

Corona in Bhopal: गैस पीड़ितों के अस्पताल बीएमएचआरसी के आइसोलेशन वार्ड में 6 लोगों की कोरोना से मौत, अस्पताल में ऑक्सीजन बेड और आईसीयू सुविधाओं की कमी

Updated: Sep 19, 2020 05:28 PM IST

भोपाल में कोरोना से मरने वाले 60 फीसदी लोग गैस पीड़ित

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना के कारण मरने वाले लोगों में 60 फीसदी लोग भोपाल गैस त्रासदी प्रभावित हैं। पिछले पंद्रह दिनों में भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के अलग अलग आइसोलेशन वार्ड में 6 लोगों की कोरोना से मौत हो गई है। बीएमएचआरसी भोपाल गैस त्रासदी प्रभावितों के उपचार के लिए बनाया गया एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है जिसे आईसीएमआर द्वारा संचालित किया जाता है। 

भोपाल गैस त्रासदी प्रभावितों के लिए काम करने वाले संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई निगरानी समिति को एनएमएचआरसी की शिकायत भी की है। संगठनों ने निगरानी समिति को पत्र लिखकर कहा है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और कुप्रबंधन से गैस त्रासदी प्रभावितों की जान जा रही है। संगठनों का आरोप है कि बीएमएचआरसी में एक भी पूर्णकालिक डॉक्टर नहीं है। संगठन ने अपने पत्र में कहा है कि आइसोलेशन वार्ड में 6 लोगों की कोरोना से मौत का कारण ऑक्सीजन बेड और आईसीयू सुविधाओं की कमी है। 

भोपाल गैस पीड़ित संगठन पत्र संगठनों ने निगरानी समिति को लिखे अपने पत्र में कहा है कि राजधानी में कोरोना के कारण हुई कुल मौतों में से 60 फीसदी भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित हैं। जबकि गैस पीड़ितो की संख्या राजधानी की कुल आबादी की  केवल 25 प्रतिशत हैं। संगठनों ने निगरानी समिति से कहा है कि बीएमएचआरसी में गैस प्रभावितों को मरने के लिए छोड़ दिया गया है।

अस्पताल में नहीं दिया जा रहा प्रवेश 

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन मरीजों को आईसीयू सुविधाओं या न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रो और न्यूरो सर्जरी की ज़रूरत है उन्हें अस्पताल में प्रवेश तक करने से रोका जा रहा है। आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक महामारी के दौर में अस्पताल में पहले की तुलना में गैस पीड़ितों के प्रवेश में 2 से 11 गुना तक कमी आई है। भोपाल गैस पीड़ित महिला कर्मचारी संघ की रशीदा बी एनडीटीवी से कहती हैं कि बीएमएचआरसी का आदर्श वाक्य 'गैस पीड़ितों की सेवा में' है तो वहीं दूसरी तरफ यह अस्पताल कोरोना की सबसे कमज़ोर आबादी की चिकित्सा ज़रूरतों की अनदेखी कर रहा है।