अगली घोषणा से पहले सतर्क रहे सरकार, दिल्ली की तर्ज़ पर एमपी में भी याचिका की पैरवी

घोषणा पूरी नहीं हुई तो हो सकती है क़ानूनी कार्रवाई- दिल्ली हाईकोर्ट, मध्य प्रदेश में भी इसी तर्ज पर याचिका की मांग, सीएम शिवराज ने कई घोषणाओं को नहीं किया है पूरा

Updated: Jul 24, 2021, 11:44 AM IST

अगली घोषणा से पहले सतर्क रहे सरकार, दिल्ली की तर्ज़ पर एमपी में भी याचिका की पैरवी

भोपाल। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई जन हितैषी योजनाओं का ऐलान किया था। हालांकि, पूर्व की तरह कोरोना काल में भी किए गए वादे सरकार भूल चुकी है। लेकिन इस बार वादों को भूलना राज्य सरकार को महंगा पड़ सकता है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद जिसमें कोर्ट ने वादे को पूरा करने का निर्देश दिया है अब मध्य प्रदेश में भी इस तरह की याचिका याचिका दायर करने की पैरवी की जा रही है है।

कांग्रेस के दिग्गज नेता व विधायक लक्ष्मण सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि, 'दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला,संजय हेगड़े जी की याचिका पर "मुख्य मंत्री द्वारा घोषणाएं पूरी नहीं करने पर कानूनी कार्यवाही संभव!! इस निर्णय का स्वागत है। मध्य प्रदेश में भी एक ऐसी याचिका की अत्यंत आवश्यकता है!!' 

लक्ष्मण सिंह के इस सुझाव पर दिग्गज वकील और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने कहा है कि, 'लक्ष्मण सिंह जी मध्य प्रदेश कंगाल हो जाएगा। सीएम शिवराज केजरीवाल की जैसी कई हज़ार घोषणा कर चुके है। उन्हें मज़ाक़ में घोषणा वीर बुलाया जाता है। लाखों करोड़ की सीएम एमपी की घोषणा का पैसा कहा है। हम तो क़र्ज़ के बोझ में दिन प्रति दिन ख़त्म होते जा रहे है।'

इन वादों को पूरा नहीं कर पाई है सरकार

* 1 लाख रुपए अनुग्रह राशि की घोषणा:- इसी साल 20 मई को सीएम शिवराज ने एक राज्य सरकार के एक फैसले का ऐलान करते हुए कहा था कि कोरोना के कारण दूसरी लहर में जिस परिवार में मृत्यु हुई है उस परिवार को एक लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। इस ऐलान के दौरान सीएम ने कहा था कि, 'आखिर उनके घर संकट आई है, हम केवल शाब्दिक सहानुभूति देकर नहीं रह सकते। वो हमारे अपने लोग हैं। हमने कोशिश की हम बचा नहीं पाए। परिवार का तो नुकसान हो गया। लेकिन उस परिवार को एक लाख रुपए अनुग्रह राशि दी जाएगी। 

हैरानी की बात ये है कि सीएम के बयानबाजी के बाद अबतक इस दिशा में कोई भी प्रगति नहीं हुई है। इन योजना के अंतर्गत न तो हितग्राहियों का चयन हुआ है और न ही किसी जिले में ऐसे लोगों से आवदेन ही मांगा गया है। संभव हो कि सीएम इस घोषणा को भूल भी चुके होंगे।

* ऑक्सीजन प्लांट लगाने की बात हवा-हवाई

सीएम शिवराज ने कोरोना की पहली लहर के दौरान ही 6 महीनों के भीतर बाबई के मोहासा में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का घोषणा की थी। यहां बड़े धूमधाम से भूमिपूजन तक किया गया था। सीएम की घोषणा के बाद निर्माण की डेडलाइन भी पिछले साल ही दिसंबर में पूरी हो गई थी। लेकिन भूमिपूजन के अलावा कार्य में कोई प्रगति नहीं हुई। इतना ही नहीं बीते साल सितंबर में 9 जिलों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के टेंडर जारी किए गए थी। दावा था कि 6 महीने के भीतर ऑक्सीजन प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। 

सरकार के ऐलान के 6 महीने बाद जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो ज्ञात हुआ कि एक भी जिले में ऑक्सीजन प्लांट निर्माण कार्य पूरा तो दूर शुरू भी नहीं हुआ था। इसके बाद ऑक्सीजन संकट से जूझते प्रदेश की खबरें सभी ने देखी। हालांकि, सरकार ने ऐलान करने में कोताही नहीं बरती। दूसरी लहर में सरकार ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि वे ऑक्सीजन प्लांट क्यों नहीं बन पाए बल्कि 4 गुना ज्यादा प्लांट्स लगाने की घोषणा हुई। इस बार एक दो नहीं बल्कि 37 ऑक्सीजन प्लांट बनाने की घोषणा कर दी गई। ट्रेंड देखकर तो यही प्रतीत होता है कि यदि संभावित तीसरी लहर आती है तो सरकार इस बार सैंकड़ों ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने की घोषणा कर सकती है।

* राशन, एजुकेशन और पेंशन

कोविड-19 के दौरान सैंकड़ों बच्चे अनाथ हो गए। सीएम ने तत्काल घोषणा किया है कि ऐसे बच्चों को राज्य सरकार फ्री राशन, मुफ्त शिक्षा के साथ पेंशन देगी ताकि उनके भरण पोषण में कोई दिक्कत न हो। इस योजना से संबंधित कार्य भी शुरू हो चुके हैं, हालांकि जमीनी हालात ये हैं कि अनाथ होने वालों की संख्या सैंकड़ों में है और सरकार ने सिर्फ कुछ बच्चों को चिन्हित किया है। कई मामले तो ऐसे हैं कि मां-बाप का साया उठने के बाद बच्चे कार्यालयों का चक्कर काटते फिर रहे हैं ताकि वह ये साबित कर पाएं की उनके मां-बाप कोरोना वायरस के कारण दुनिया से चले गए। लेकिन सरकार उन्हें कोरोना मृतक मानने से इनकार कर दे रही है।

ऐसा ही मामला फ्रंटलाइन वर्कर्स यानी कोरोना योद्धाओं के साथ है। राज्य सरकार ने कोरोना से मरने पर मृतक वॉरियर के परिवार को 50 लाख रुपए देने का ऐलान किया था। अबतक 152 पुलिसकर्मियों की कोरोना काल में ड्यूटी के दौरान जान चली गई। इनमें महज 7 मृतकों के परिजनों को लाभ मिल पाया है, बाकी सभी इंतजार ही कर रहे हैं। इतना ही नहीं कइयों के फॉर्म भी रिजेक्ट कर दिए गए हैं। सरकार या तो उन्हें कोरोना योद्धा मानने से इनकार कर रही है, या फिर यह मानने को तैयार नहीं कि कोरोना वायरस के चपेट में आकर उनकी मौत हुई।

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ये तो केवल कोरोना काल से जुड़ी घोषणाएं हैं। इसके अलावा दर्जनों ऐसे वादें हैं, जिन्हें सरकार द्वारा भुला दिया गया। मसलन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उपचुनाव के पहले करीब 10 हजार करोड़ रुपए के दर्जनों विकास कार्यों की घोषणाएं की गई थी। उपचुनाव में इस क्षेत्र में बीजेपी को उम्मीद के अनुरूप जनसमर्थन प्राप्त नहीं हुआ। अब खबर है कि सरकार ने इन योजनाओं के करीब 90 फीसदी फंड वापस ले लिया है। तर्क है कि ये योजनाएं रोके नहीं गए हैं, जब पैसे आएंगे तो लागू किए जाएंगे। जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि कभी इतने पैसे होंगे ही नहीं कि ये योजनाएं लागू हो सकें। राज्य सरकार पर 2 लाख 53 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है, साथ ही रेवेन्यू में भी 30 फीसदी की गिरावट आई है।

शिवराज को CM रहने का कोई अधिकार नहीं- CPIM

मामले पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने कहा है कि सीएम शिवराज को सरकार में रहने का कोई अधिकार नहीं है। सीपीआईएम नेता बादल सरोज ने कहा, 'ये सबसे ज्यादा कर्जदार सरकार है। कर्मचारियों के पैसे, मनरेगा मजदूरों के पैसे बांटने में भी दिक्कत आ रही है। इन्होंने खाद्य सामग्री बांटने का वादा किया था, जो पूरा नहीं कर पाए हैं। हद्द तो ये हो गई है कि वादों का याद दिलाने पर भी ये लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। ये हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुनते। इन्हें सरकार में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।'

क्या है दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश

दरअसल, दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने कोरोना संकट को देखते हुए मकान मालिकों से कहा था कि जो असमर्थ हैं, उनसे आप किराया न वसूलें। यदि कोई किराएदार गरीब है और वह पैसा नहीं दे पा रहा है तो दिल्ली सरकार उनके बदले किराया देगी। हालांकि, राज्य सरकार ने इस घोषणा पर अमल नहीं किया। दिल्ली हाईकोर्ट में जब इस संबंध में याचिका दायर की तो न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केजरीवाल सरकार को अपने वादे पूरे करने होंगे। न्यायालय ने इस वादे पर 6 हफ्ते के भीतर फैसला लेने का निर्देश भी दिया है। इसके बाद अब मध्य प्रदेश में भी इस तरह की याचिका दायर करने की बात हो रही है।