कांग्रेस के गढ़ में बीजेपी के सिंबल पर इमरती जीतेंगी चुनाव या समधी बनेंगे विधायक, फैसला आज

Dabra By Poll Results: बीजेपी में दो गुट होने से पिछड़ती दिख रही थीं इमरती, समधी सुरेश राजे हैं कांग्रेस उम्मीदवार

Updated: Nov 10, 2020, 12:36 AM IST

कांग्रेस के गढ़ में बीजेपी के सिंबल पर इमरती जीतेंगी चुनाव या समधी बनेंगे विधायक, फैसला आज
Photo Courtesy : The Economic Times

डबरा। मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के शुरुआती रुझान आने ही वाले हैं। इसी के साथ सब की नजर प्रदेश के बहुचर्चित उम्मीदवारों पर है। सिंधिया की चहेती मंत्री और बेलगाम बयानबाजी के कारण चर्चाओं में रहने वाली इमरती देवी की हाई प्रोफाइल सीट डबरा के मतदाताओं ने क्या निर्णय लिया है इस बात की जानकारी बस कुछ ही घंटों में मिलने वाली है।

डबरा विधानसभा क्षेत्र में कुल 2 लाख 18 हजार 131 मतदाता हैं जिनमें पुरुषों की संख्या 1 लाख 16 हजार 836 और महिला मतदाताओं की संख्या 1 लाख 1 हजार 288 है। चुनाव आयोग ने मुताबिक डबरा में 66.72 फीसदी मतदान हुए हैं यानी कि तकरीबन 1 लाख 45 हजार मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। साल 2008 विधानसभा चुनाव से यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों से कांग्रेस इस सीट पर जीत हासिल कर रही है इसलिए डबरा को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।

इमरती के समधी हैं कांग्रेस का चेहरा

इस बार के विधानसभा उपचुनाव में इमरती देवी बीजेपी की ओर से मैदान में खड़ी है, तो वहीं कांग्रेस ने उनके ही समधी सुरेश राजे को मैदान में उतारा है। दिलचस्प बात यह है कि सुरेश राजे ने 2018 में इमरती देवी के कहने पर ही बीजेपी छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी और अब वे कांग्रेस की ओर से इमरती के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इसके पहले 2013 विधानसभा चुनाव में जब इमरती कांग्रेस में थी तब राजे बीजेपी के टिकट पर इमरती के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे थे।

बीएसपी उम्मीदवार पर भी रहेगी नज़र

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने डबरा से संतोष गौड़ को अपना उम्मीदवार बनाया है। डबरा विधानसभा में वोटिंग के हिसाब से देखें तो दलित, अनुसूचित जातियों का दबदबा रहा है। इन जातियों के वोटर्स 60 हजार से भी अधिक हैं। साल 2018 विधानसभा चुनाव से पहले हुए दलित आंदोलन के बाद डबरा की जनता ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया था। जिसका असर ये हुआ कि इस क्षेत्र के ज्यादातर वोटर कांग्रेस की ओर चले गए, नतीजतन पिछले चुनाव में इमरती देवी ने यहां 50 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी।

हालांकि इस बार समीकरण बदल गए हैं। इमरती खुद बीजेपी में चली गईं हैं जिस वजह से इन जातियों का वोट उन्हें न के बराबर ही मिलने की संभावना है। हालांकि देखने की बात यह होगी कि बीएसपी उम्मीदवार संतोष गौड़ क्या चुनाव के नतीजों पर कोई खास असर डाल पाएंगे? 

स्थानीय समस्याएं रही है मुख्य चुनावी मुद्दा

डबरा विधानसभा चुनाव में इस बार स्थानीय समस्याएं ही जनता के लिए मुख्य मुद्दा रही है। हालांकि, कांग्रेस ने इसके अलावा बिकाऊ बनाम टिकाऊ को भी खूब भुनाया है। डबरा के शहर और ग्रामीण इलाकों में पेयजल की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है। इलाके में अवैध रेत का उत्खनन, बेरोजगारी, शराब का अवैध कारोबार भी बड़ी समस्या है। डबरा में अवैध रेत का परिवहन और इससे होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में शासन प्रशासन अक्सर नाकाम होता दिखाई देता है। डबरा के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की भी भारी कमी है। जिससे यहां के गंभीर मरीजों को ग्वालियर रैफर करने की जरूरत पड़ती रहती है। 

चावल और चीनी मिल को भी दोनों पार्टियों ने भुनाया

विधानसभा उपचुनाव के दौरान दोनों पार्टियों ने चावल और चीनी मिल के मुद्दे को भी खूब भुनाया है। बीजेपी में इन्हें खुलवाने का वादा किया है वहीं कांग्रेस ने बीजेपी के ऊपर इन्हें बंद करवाने का आरोप लगाया है। बता दें कि डबरा विधानसभा में कभी 300 चावल की मिलें हुआ करती है जो अब घटकर 15 से 20 हो चुकी है। इसके अलावा यहां चीनी मिल भी थी वह भी बंद पड़ी है और गन्ना किसानों का कई रुपए बकाया भी है।