शहडोल में सड़कों के अभाव में मरीज को खाट पर लाद कर पहुंचाया अस्पताल, दो गांवों के बीच आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बनी सड़क

दर्द से तड़पती बुजुर्ग महिला घंटों बाद पहुंची अस्पताल, परिजनों ने खटिया पर लादकर तय किया रास्ता, बेम्हौरी से पटना गांव के बीच सड़क नहीं होने से परेशान हैं ग्रामीण

Updated: Sep 14, 2021, 11:44 AM IST

शहडोल में सड़कों के अभाव में मरीज को खाट पर लाद कर पहुंचाया अस्पताल, दो गांवों के बीच आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बनी सड़क
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शहडोल। मध्य प्रदेश में विकास की गंगा बहाने का दावा करने वाली बीजेपी सरकार के खोखले दावों की पोल एक बार फिर खुली है। इस बार मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीरें शहडोल जिले से आई हैं। जहां एक बुजुर्ग के बीमार होने पर उसे खटिया में टांगकर अस्पताल पहुंचाया गया। तीन किलोमीटर का सफर बुजुर्ग को खटिया में लेकर तय किया।बुजुर्ग का बेटा और पोता कीचड़ भरे कच्चे रास्ते और नदी को पार करके किसी तरह अस्पताल तक पहुंचे, और बुजुर्ग का इलाज करवाया। महिला रास्ते भर कराहती रही।

मामला शहडोल और अनूपपुर से लगे सोहागपुर जनपद का है। यहां के ग्राम पंचायत बेम्हौरी में सड़कों के नाम पर केवल कच्चा रास्ता है। यहां की 86 वर्षीय बुजुर्ग महिला प्रेमबती बैगा की तबीयत अचानक खराब हो गई। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग पास के पटना गांव में अपने किसी रिश्तेदार के घर से लौट रही थी, तभी उसकी तबीयत खराब हो गई। जिसके बाद उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए बेटा और पोता खाट पर लाद कर सड़क तक आए और फिर अस्पताल पहुंचे। इसके लिए उन्हें कच्चा रास्ता और उफनाता नाला पार करना पड़ा। तब जाकर उन्हें सड़क मिली फिर वे बाइक से किसी कदर अस्पताल पहुंचे।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बाद भी सड़कों का निर्माण नहीं हुआ है। बारिश के मौसम में लोगों की जान पर बन आती है। बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए खाट पर लादकर रास्ता पार करवाना पड़ता है। क्योंकि यहां ना तो दो पहिया और ना ही चार पहिया वाहन चल सकते हैं।

दरअसल यहां की करीब साढ़े 3 किलोमीटर की सड़क आजादी के बाद से ही नहीं बनी है। बेम्हौरी से पटना गांव का रास्ता करीब 3.40 किलोमीटर का है। यहां को लोगों को आजादी के 75 साल बाद एक अदद सड़क की दरकार है। यहां सड़क आजादी के बाद से आज तक नहीं बनी है। यहां पर एक नाला पड़ता है जो बारिश के दिनों में उफान पर आ जाता है। जिससे ग्रामीणों की परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। हर बार चुनावी वादे किए जाते हैं लेकिन इन गरीब ग्रामीणों की सुध किसी ने नहीं ली। ये अब भी विकास की बाट जोहने को मजबूर हैं।