उपयंत्री ने मोहन भागवत को बताया शकुनी, सीनियर अधिकारी ने नहीं दी रविवार की छुट्टी

सुसनेर जनपद पंचायत के उपयंत्री राजकुमार यादव ने व्हाट्सएप ग्रुप में रविवार को अपनी छुट्टी की अर्जी दी थी, अधिकारी ने संदेश लिखा था कि पिछले जन्म में अवैसी नकुल थे और उनके बाल सखा थे, जबकि मोहन भागवत शकुनी मामा थे

Updated: Oct 10, 2021, 03:42 PM IST

उपयंत्री ने मोहन भागवत को बताया शकुनी, सीनियर अधिकारी ने नहीं दी रविवार की छुट्टी
Photo Courtesy: Live Law

भोपाल। आगर मालवा के एक अधिकारी की छुट्टी की अर्जी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। अधिकारी ने सरसंघचालक मोहन भागवत की तुलना महाभारत के विलेन शकुनी मामा से कर दी है। इतना ही नहीं अधिकारी का कहना है कि पिछले जन्म में मोहन भागवत ही शकुनी थे। यह सब अधिकारी ने रविवार को छुट्टी पाने के लिए किया। लेकिन सीनियर अधिकारी ने उपयंत्री की छुट्टी रद्द कर दी। 

क्या है मामला 

आगर मालवा के सुसनेर जनपद पंचायत में उपयंत्री के पद पर पदस्थ राजुकमार यादव को रविवार का अवकाश चाहिए था। इसके लिए उन्होंने ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप में अजीबोगरीब लेकिन दिलचस्प अर्जी भेजी। राजकुमार यादव ने अपनी छुट्टी की अर्जी में लिखा कि उन्हें अपने पिछले जन्म का आभास हुआ है। उन्हें यह ज्ञात हुआ कि वे पिछले जन्म में नकुल के बालसखा थे। और यह नकुल कोई और नहीं बल्कि एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी थे। 

इसके साथ ही उपयंत्री राजकुमार यादव ने बताया कि उनके आभास के मुताबिक आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शकुनी मामा थे। राजकुमार यादव ने अपनी अर्जी में कहा कि वे अपने जीवन के रहस्य के बारे में जानने के लिए अपने घर पर पाठ कराना चाहते हैं, अपने अहंकार को मिटाने के लिए घर घर जा कर भीख मांगना चाहते हैं, इसलिए उन्हें रविवार को अवकाश की दरकार है। 

सीनियर अधिकारी ने रद्द कर दी छुट्टी 

राजकुमार यादव की इस अर्जी को उनके सीनियर अधिकारी यानी सुसनेर जनपद के सीईओ पराग पंथी ने खारिज कर दिया। दिलचस्प बात यह कि उन्होंने राजकुमार यादव की इस अर्जी का जवाब भी उन्हीं के अंदाज में दिया। सीईओ ने कहा कि आप अपने अहंकार से छुटकारा पाना चाहते हैं, यह बात बहुत प्रशंसनीय है। 

लेकिन यह मनुष्य का अहंकार ही है कि वह यह सोचता है कि वह रविवार के दिन को अपनी इच्छा के अनुसार बिता सकता है। इसलिए आपके इस अहंकार को बीज को समाप्त करने एकमात्र तरीका यही है कि आप हर रविवार को कार्यालय में उपस्थित रहें। ताकि अवकाश मनाने के आपके अहंकार का नाश हो सके।