गुना: महिला आरक्षित सीटों पर पुरुषों ने भरा पर्चा, आशा बहनों के चुनाव लड़ने पर रोक, पूर्व डकैत की पत्नी सरपंच निर्वाचित

गुना की सिनगयाई पंचायत से पूर्व डकैत मलखान सिंह की पत्नी निर्विरोध बनीं सरपंच, किसी ने भी विरोध में नहीं भरा पर्चा, मलखान सिंह बोले- अब विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे

Updated: Jun 09, 2022, 12:50 PM IST

गुना: महिला आरक्षित सीटों पर पुरुषों ने भरा पर्चा, आशा बहनों के चुनाव लड़ने पर रोक, पूर्व डकैत की पत्नी सरपंच निर्वाचित

गुना। मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पंचायत चुनावों को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रदेश के गुना जिले में कुछ अतिउत्साही पुरुषों ने तो महिला आरक्षित सीट से भी पर्चा भर दिया। हालांकि, जांच के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उसे रिजेक्ट किया।गुना के ही सिनगयाई पंचायत से पूर्व डकैत मलखान सिंह की पत्नी सरपंच बनीं हैं। खास बात ये है कि उनके खिलाफ किसी ने पर्चा ही नहीं भरा, ऐसे में उन्हें निर्विरोध सरपंच घोषित किया गया है।

जानकारी के मुताबिक गुना के बमोरी जनपद में महिला सीट पर पुरुषों ने नामांकन फॉर्म जमा कर दिया। दो सीट पर ऐसे नामांकन खारिज कर दिए गए। ये दोनों सीटें सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुईं थी, लेकिन दो पुरुषों ने फॉर्म भर दिए। बमोरी के रिटर्निंग ऑफिसर ने बताया कि मंगलवार को स्क्रूटिनी की गई। जनपद सदस्य का वार्ड क्रमांक 2 सामान्य महिला के लिए आरक्षित था। यहां से संतोष गुर्जर ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इसी तरह वार्ड क्रमांक 13 भी सामान्य महिला के लिए आरक्षित था। इस वार्ड में भी दिलीप मीना ने फॉर्म भर दिया। जब जांच की गई तो सामने आया कि महिला सीट पर पुरुषों ने नामांकन कर दिया है, ऐसे में उन्हें निरस्त कर दिया गया।

रिटर्निंग अफसर के मुताबिक बमोरी जनपद में कुल 7 फॉर्म रिजेक्ट हुए हैं। एक फॉर्म जाति संबंधी डॉक्यूमेंट न होने के कारण रिजेक्ट हुआ। अन्य चार ऐसे थे जिनमें प्रस्तावक ही उस वार्ड का मतदाता नहीं था। रिटर्निंग अफसर ने बताया कि जिस उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करना है, वह चाहे किसी भी वार्ड का हो, लेकिन प्रस्तावक उसी वार्ड का मतदाता होना चाहिए जहां से उम्मीदवार चुनाव लड़ना चाहता है।

आशा बहनों के चुनाव लड़ने पर रोक

गुना में एक आशा कार्यकर्ता का नामांकन निरस्त कर दिया गया। रिटर्निंग ऑफिसर ने कारण दिया गया कि वह शासन से हर महीने एक निश्चित मानदेय प्राप्त करती है, इसलिए उसे चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मामला अनुसूचित जाति(SC) के लिए आरक्षित मंगवार पंचायत का है। गांव में ही काम करने वाली आशा कार्यकर्ता सविता बाई ने सरपंच पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। इसके उसने आशा कार्यकर्ता के पद से अपना इस्तीफा भी सौंप दिया गया था, बावजूद उसका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया गया।

पहले यह माना जा रहा था कि आशा कार्यकर्ता शासकीय कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आती है, इसलिए वह चुनाव लड़ सकती है। लेकिन बाद ने अधिकारियों ने उसे भी लाभ का पद मानते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। सविता बाई ने अपना इस्तीफा भी सौंप दिया था। लेकिन तय समय तक इस्तीफा स्वीकार नहीं हो सका।

पूर्व डकैत की पत्नी सरपंच

गुना जिले के आरोन इलाके की सिनगयाई पंचायत में पूर्व डकैत मलखान सिंह की पत्नी ललिता राजपूत 
निर्विरोध सरपंच चुनी गई हैं। ललिता के खिलाफ किसी ने भी पर्चा नहीं भरा था। खास बात यह है कि इस पंचायत के सभी 12 पंच भी निर्विरोध चुने गए हैं। इतना ही नहीं सभी 12 पंच महिलाएं हैं। यानी इस पंचायत में अब पूरी तरह से महिलाओं की सरकार है। 

डकैत रहे मलखान सिंह ने निर्विरोध निर्वाचन को लेकर कहा कि, 'वर्षों से ग्राम पंचायत में विकास नहीं हो रहा था। सरपंच कई बदले और कई चले गए। गांव में नल, बिजली, सड़क, खरंजा सभी काम पड़ा हुआ है। 1200 ग्रामीणों की यह पंचायत है। अब कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। गांव में सभी विकास के काम होंगे। निर्विरोध पंचायत में पूरे काम करके दिखाएंगे। किसी कीमत पर किसी भी तरह का भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे।'