ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ हाईकोर्ट का आदेश, तथ्यों को छिपाने के मामले में ग्वालियर एसपी करें जांच

हाईकोर्ट ने पूर्व कांग्रेस नेता गोपीलाल भारती को स्वतंत्र किया है कि यदि वह एसपी की जांच से संतुष्ट नहीं होते तो कोर्ट में आपराधिक विधि के अनुसार याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं

Updated: Jul 30, 2022, 09:26 AM IST

ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ हाईकोर्ट का आदेश, तथ्यों को छिपाने के मामले में ग्वालियर एसपी करें जांच
Photo Courtesy: ET

ग्वालियर। राज्यसभा के लिए दाखिल अपने नामांकन पत्र में कथित रूप से जानकारी छिपाने के मामले में केंद्रीय उड्डयन मंत्री सिंधिया की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। एमपी हाईकोर्ट ने इस मामले में एसपी ग्वालियर को सिंधिया के खिलाफ जांच के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता गोपीलाल भारती को स्वतंत्र किया है कि यदि वह एसपी की जांच से संतुष्ट नहीं होते तो कोर्ट में आपराधिक विधि के अनुसार याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं।

दरअसल, गोपीलाल भारती ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी दायर कर कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 में राज्यसभा सांसद के लिए दाखिल नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण की जानकारी नहीं दी थी। इसके लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को दंडित करने के लिए FIR दर्ज की जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल व अधिवक्ता कुबेर बौद्ध ने कोर्ट को बताया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने के साथ जो शपथ पत्र प्रस्तुत किया है, उसमें तथ्यों को छुपाया गया।

यह भी पढ़ें: दिग्विजय सिंह के विरुद्ध BJP लामबंद, CM बोले- उन्होंने गेट तोड़ने की कोशिश की, फोटो लेकर पीसी करने बैठे शर्मा

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि सिंधिया ने खुद के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण की जानकारी नामांकन के साथ पेश शपथ पत्र में नहीं दी। इसकी शिकायत पुलिस से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई। इस पर सांसद विधायकों की विशेष अदालत में भी आवेदन दाखिल कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया गया, लेकिन यह आवेदन विशेष कोर्ट ने निरस्त कर दिया। इसी फैसले को पुनरीक्षण याचिका में चुनौती दी गई है।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी व शासकीय अधिवक्ता यश सोनी ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि CrPC की धारा 154(3) के तहत एसपी को आवेदन देने का विकल्प शिकायतकर्ता के पास उपलब्ध है। इस पर कोर्ट ने एसपी को आवेदन देने की छूट देकर याचिका का पटाक्षेप कर दिया। साथ ही ग्वालियर एसपी को मामले की जांच करने के लिए निर्देशित भी किया।