इंदौर: MD ड्रग्स निकली यूरिया, बर्खास्त पुलिसकर्मी बरी, अब 2 IPS समेत 19 पर लगाया साजिश का आरोप

इंदौर में करोड़ों रुपये की एमडी ड्रग्स बताकर जब्त किए गए 198 ग्राम पदार्थ की जांच में वह यूरिया निकला। भोपाल और हैदराबाद की सरकारी लैब की रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। पूर्व पुलिसकर्मी ने अब दो IPS अधिकारियों समेत 19 पुलिसकर्मियों पर झूठा फंसाने का आरोप लगाया है।

Publish: Jun 27, 2026, 12:04 PM IST

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में करोड़ों रुपये की एमडी ड्रग्स बरामद होने के जिस मामले को पुलिस ने बड़ी सफलता बताया था वह अब जांच में पूरी तरह उलट गया है। जब्त किए गए 198 ग्राम संदिग्ध पदार्थ की दो सरकारी लैबों की जांच में पुष्टि हुई कि वह कोई मादक पदार्थ नहीं बल्कि साधारण यूरिया है। इसके बाद विशेष अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए पूर्व पुलिसकर्मी लखन गुप्ता सहित तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। अब लखन गुप्ता ने दो आईपीएस अधिकारियों समेत 19 पुलिसकर्मियों पर साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

करीब 16 महीने पहले इंदौर पुलिस ने विजय पाटीदार और शाहनवाज शेख को गिरफ्तार कर दावा किया था कि उनके कब्जे से 198 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद हुई है। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिसकर्मी लखन गुप्ता का नाम लिया था। जिसके आधार पर उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। मामले के बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए लखन गुप्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

जांच के दौरान जब्त पदार्थ के नमूने भोपाल स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब भेजे गए। लैब रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि कथित एमडी ड्रग्स वास्तव में यूरिया है और उसमें किसी प्रकार का नारकोटिक पदार्थ नहीं मिला। इसके बाद पुष्टि के लिए नमूने हैदराबाद की सेंट्रल लैब भेजे गए। वहां से भी वही रिपोर्ट सामने आई। दोनों वैज्ञानिक जांच रिपोर्टों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

अदालत से राहत मिलने के बाद लखन गुप्ता ने विशेष न्यायालय में परिवाद दायर कर दो आईपीएस अधिकारियों सहित 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि उन्हें सुनियोजित तरीके से फर्जी ड्रग्स मामले में फंसाया गया। जिसकी वजह से उनकी नौकरी चली गई और उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

लखन गुप्ता का कहना है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने मुखबिर के माध्यम से पहले से गिरफ्तार आरोपियों से उनका नाम बुलवाया। इसके बाद उन्हें आजाद नगर क्षेत्र से उठाकर तेजाजी नगर थाने लाया गया, पूछताछ की गई और फिर ड्रग्स मामले में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया।

लखन गुप्ता के अधिवक्ता नितिन पाराशर के अनुसार, परिवाद में विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है। इस दौरान अदालत जांच के आदेश, एफआईआर दर्ज कराने या अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई को लेकर फैसला सुना सकती है।