शांति समझौते के 10 दिन बाद ही अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने, IRGC ने US बेस उड़ाए
अमेरिकी सेना ने ईरानी मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स को निशाना बनाया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने सीजफायर तोड़ा, इसलिए जवाबी कार्रवाई की गई।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। शांति समझौते के दस दिन बाद ही शुक्रवार, 26 जून को अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए। जवाब में ईरान ने भी इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। यह घटनाक्रम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कार्गो जहाज पर हमले के बाद सामने आया है। अमेरिका ने इस हमले के लिए तेहरान को जिम्मेदार ठहराया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 25 जून को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के कार्गो शिप ‘एमवी एवर लवली’ पर ड्रोन हमला किया था। दूसरी ओर, ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना ने दावा किया है कि उसने जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह भी घोषणा की, उसकी सेनाएं व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सहयोग और समर्थन जारी रखेंगी। साथ ही, ईरान के साथ हुए समझौते को पूरी तरह लागू करने के लिए क्षेत्र में मौजूद और तैयार रहेंगी।
अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने सेंटकॉम का बयान साझा करते हुए कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा। जेडी वेंस ने एक्स पर लिखा, "ईरान ने युद्धविराम समझौते पर दस्तख़त किए हैं। हमने उसका पालन किया है। अगर उन्हें इस एमओयू के लागू होने पर कोई आपत्ति है, तो वे फ़ोन कर सकते हैं। लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।"
ईरान की संसद के सदस्य इब्राहिम अजीजी ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच ईरान पर हमला किया है। युद्धविराम का यह उल्लंघन अमेरिका के लिए पीछे हटने और पछतावे की वजह बनेगा। उधर, ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल के हमले में साथ देने वाले NATO सदस्य देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन देशों को बताना चाहिए कि उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन क्यों किया।
वहीं, इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-मंसूरी इलाके में लोगों को घर खाली करने की चेतावनी दी। वहीं, हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि इजराइल को लेबनान की पूरी जमीन से बिना शर्त हटना होगा और संगठन किसी भी हाल में इजराइल से रिश्ते सामान्य नहीं करेगा।




