राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने सौंपा इस्तीफा, 8 आरोपी गिरफ्तार

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में बड़ा मोड़ आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, एसआईटी ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

Updated: Jun 26, 2026, 03:35 PM IST

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में गबन के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपा है। जानकारी के अनुसार, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारियों से अलग कर दिया गया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि चंपत राय के पास राम मंदिर की समग्र प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी थी। जबकि, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव भी मंदिर संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। एक सप्ताह पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के दौरान चंपत राय की अनुपस्थिति के बाद से ही उनके पद छोड़ने की चर्चाएं शुरू हो गई थी।

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राम मंदिर के दानपात्रों से नकदी और अन्य मूल्यवान चढ़ावे में अनियमितताओं का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली इस समिति में किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरत्न कुमार को भी शामिल किया गया। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी। जिसके बाद जांच और कानूनी कार्रवाई में तेजी आई।

गुरुवार देर शाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं में दर्ज किया गया है जो कर्मचारी द्वारा चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं। एफआईआर में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा या अन्य वरिष्ठ ट्रस्ट पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं हैं।

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पुलिस ने इस मामले में रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा को गिरफ्तार किया है। ये सभी मंदिर के दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने, निगरानी करने या नकदी की गिनती से जुड़े कार्यों में नियुक्त थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन लोगों ने आपसी साजिश के तहत चढ़ावे की राशि का गबन किया और उससे करोड़ों रुपये की संपत्तियां अर्जित की। जांच के दौरान कुछ आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी भी बरामद होने की बात सामने आई है। सभी आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने की तैयारी की जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा देते हुए कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि जनआस्था और सनातन परंपरा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने राजनीतिक दलों से भी अपील की है कि बिना प्रमाण के आरोप लगाने से बचें और यदि किसी के पास ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें एसआईटी के समक्ष प्रस्तुत करें।

इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाते हुए पूछा कि राम मंदिर निर्माण के लिए उद्धव ठाकरे द्वारा दान की गई चार किलो चांदी का क्या हुआ और अब जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और कहा कि जिसने भी श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात किया है उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने एफआईआर को पर्याप्त नहीं बताते हुए बड़े लोगों को बचाने की आशंका भी जताई।

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दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का भी आरोप लगाया। फिलहाल एसआईटी मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे के गबन में केवल गिरफ्तार कर्मचारी शामिल थे या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क अथवा व्यापक साजिश भी काम कर रही थी।